- राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के पश्चिमी उत्तर प्रदेश महासचिव कैलाश लांबा ने बताया कि ये चुनावी बजट है। बजट में शब्दों का खेल है और किसानों के लिए कुछ खास घोषणा नहीं है। किसान, कृषि कल्याण के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं, लेकिन धरातल पर आती नहीं है।
- भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के जिलाध्यक्ष चौधरी नितिन सिरोही ने बताया कि इस बजट से किसानों को ज्यादा उम्मीद नहीं थी। एक देश एक टैक्स को लागू कर सकते हैं तो एक फसल एक मूल्य को लागू किया जा सकता है। बजट में कोई नई योजना कृषि कल्याण के लिए नहीं लाई गई है।
- राष्ट्रीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल तोमर ने बताया कि सरकार को कृषि क्षेत्र में सुविधाएं बढ़ाए जाने की जरूरत थी। इस बजट से किसानों को निराशा मिली है। बजट में फसल मूल्य व उर्वरकों के मूल्य कम या अनुदान बढ़ाने के लिए कुछ नहीं है। चुनाव के माहौल में किसानों की अनदेखी।