खून में घुल रहा मीठा बढ़ा रहा जिंदगी में कड़वाहट
बिजनौर। जिले में शुगर के मरीजों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। केवल सरकारी अस्पतालों में ही हर रोज 100 से ज्यादा शुगर के नए मरीज सामने आ रहे हैं। इसके अलावा निजी अस्पतालों व चिकित्सकों के पास भी मरीज आ रहे हैं। खानपान की कमी और शारीरिक श्रम न करने से जनता शुगर की चपेट में आ रही है। शुगर के मरीज इलाज तो करा रहे हैैं, लेकिन वे व्यायाम से अब भी दूरी ही बनाए हुए हैं।
शुगर भी अमीर लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब आम जनता भी शुगर की गिरफ्त में आ रही है। जिले की सभी सीएचसी, पीएचसी और जिला अस्पताल में रोज 80 से 100 मरीज सामने आ रहे हैं। यानी एक माह में केवल सरकारी अस्पतालों में ढाई से तीन और साल में 30 से 35 हजार शुगर के मरीज बन रहे हैं। जिले की आबादी साल 2011 की जनगणना में 36 लाख के आसपास थी। यानी देखा जाए तो साल में जिले की एक प्रतिशत आबादी शुगर से ग्रसित हो रही है। अगर खुद को संभाला न जाए तो शुगर जानलेवा भी साबित हो सकती है। शुगर होने पर शरीर खुद ही कई बीमारियों का घर बन जाता है।
शुगर से होती हैं ये बीमारी
लंबे समय तक शुगर पाचन क्रिया को प्रभावित करता है। पेट में ऐंठन, उल्टी और कब्ज की समस्या हो जाती है। शुगर में छोटी चोट भी नासूर बन जाती है। बीपी बढ़ती है और ध्यान न देने पर आंखों की रोशनी भी जा सकती है। यह किडनी के लिए भी घातक होती है। यह दिल का रोगी भी बना देती है।
शुगर के लक्षण
- बार-बार पेशाब आना।
- त्वचा में रूखापन आ जाना।
-शरीर में कमजोरी।
-हाथ-पैरों में जलन।
-जहां पेशाब करते हैं वहां चीटी का आना।
ये हैं कारण
- अनुवांशिक कारणों से।
- खानपान सही न होने से।
- वजन बढ़ने से।
- शारीरिक श्रम न करने से।
ये हैं बचाव के उपाय
-हर रोज योग करें।
-मीठे और जंकफूड से परहेज करें।
- शारीरिक श्रम जरूर करें।
- हर रोज तीन किमी पैदल घूमें या साइकिल चलाएं।
- समय समय पर शुगर की जांच कराते रहें।
दिनचर्या में बदलाव में जरूरी
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ.विमल कुमार के अनुसार अगर एक बार किसी को शुगर हो जाए तो यह जीवन भर रहती है। दिनचर्या में बदलाव, परहेज और दवाइयों से शुगर को कंट्रोल किया जा सकता है। उनके पास भी काफी मरीज शुगर की दवा लेने के लिए आ रहे हैं।
पहला इलाज है खानपान पर नियंत्रण
सीएमओ डॉ.विजय कुमार गोयल के अनुसार शुगर का पहला इलाज केवल परहेज है। लोगों को खानपान पर नियंत्रण वैसे भी रखनी चाहिए और कसरत करनी चाहिए। ऐसा करने वाले किसी भी पद्धति से उपचार करा सकते हैं।