ज्ञानपुर। सौ दिन के रोजगार की गारंटी वाली योजना मनरेगा की हालत खस्ता है। करीब सात महीने में पंजीकृत एक लाख 75 हजार मजदूरों में मात्र पांच फीसदी ही ऐसे हैं जिन्हें 100 दिन काम मिल सका, हालांकि विभाग का दावा है कि मार्च 2022 तक संख्या में इजाफा होगा।
मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए मनरेगा योजना वर्ष 2008 से जिले में प्रभावी हुई। शुरुआती दौर में तालाबों के सुंदरीकरण से लेकर अन्य काम तेजी से कराए गए, लेकिन समय के साथ ही विकास के दूसरे काम को भी इसी से जोड़ दिए गए। प्रधानमंत्री आवास, खड़ंजा, संपर्क मार्गों की पटरियों, पौधरोपण, पंचायत भवन, सामुदायिक शौचालय से लेकर अन्य दूसरे कार्यों को भी मनरेगा में शामिल किया गया। इससे योजना गति जरूरी पकड़ी, लेकिन 100 दिन काम दिलाने की मुहिम से भटक गई। अधिसंख्य मजदूर काम ढूंढने के लिए जगह-जगह चक्कर लगा रहे हैं। कई गांवों में रोजगार की मांग बढ़ गई है, लेकिन बिना काम किए मस्टर रोल तैयार करने की जुगत में लगे प्रधान और सचिव अब तक लेखाजोखा भी प्रस्तुत नहीं कर सके। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो पंजीकृत एक लाख 76 हजार जॉबकार्ड धारकों में 93 हजार 726 सक्रिय हैं। वित्तीय वर्ष में सक्रिय मजदूरों में किसी को 10 दिन, किसी को 40 दिन और किसी को 50 दिन ही काम मिल सका है। 100 दिन काम पाने वालों में महज आठ से नौ हजार मनरेगा मजदूर शामिल है। श्रमायुक्त मनरेगा राजाराम ने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में 18.54 लाख मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित है। कोरोना संक्रमण काल होने के बाद भी अब तक 10 लाख 49 हजार मानव दिवस सृजित हो चुके हैं। आने वाले समय में शत प्रतिशत लक्ष्य पूर्ण कर लिया जाएगा।