छुट्टा गोवंशों को आश्रय देना सरकार की प्राथमिकता में है। इसी उद्देश्य से जिले के विभिन्न इलाके में 23 पशु आश्रयस्थल बनाए गए हैं, लेकिन इनमें पशुओं की देखरेख ठीक से नहीं हो रही है। संचालकों की लापरवाही, पशुपालन विभाग की सुस्ती और प्रशासनिक अमले की अनदेखी के कारण आए दिन मवेशी मर रहे हैं। जिला मुख्यालय से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित पूरेरजा चकवा गोवंश आश्रयस्थल में तो मृत गोवंश को कुत्ते और चील कौवे नोंचकर खा रहे हैं। बावजूद इसके महकमा अंजान बना हुआ है। यहां 15 दिन में चार पशुओं की मौत हो चुकी है।
तीन दिन पहले अमर उजाला की टीम ने अस्थाई गोंवश आश्रय स्थल की पड़ताल की तो वहां की खामियां सामने आईं थी। पशु डॉक्टरों के बीते 15-20 दिन में न पहुंचने के कारण वहां तीन मवेशियों की मौत और छह के बीमार होने का मामला सामने आया था। भूसा तक नहीं था। इसकी खबर प्रकाशित होने के बाद पशुपालन विभाग थोड़ा जगा और वहां अगले ही दिन भूसा पहुंचा दिया गया। कुछ पशु डॉक्टर भी पहुंचे और पशुओं की देखभाल की कोरमपूर्ति हो गई। पशुचिकित्सा विभाग के दावे की सच्चाई जानने के लिए शनिवार की शाम करीब पांच बजे पुन: जब टीम पहुंची तो वहां की तस्वीरें और विभत्स नजर आईं। यहां दिन में मरे एक गोवंश को टीनशेड के पीछे फेंक दिया गया है, जिसे आठ-दस कुत्ते नोंचकर खाते मिले। इस संबंध में जब मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जय सिंह से बात की गई तो उन्होने मामले को दिखवाने के लिए कहा। कहा कि किसी पशु के मृत होने की जानकारी नहीं है। आश्रय स्थल में पशुओं के मृत होने की दशा में दफनाने की जिम्मेदारी संचालक की होती है। उधर, प्रधानपति अक्षय उपाध्याय ने कहा कि एक पशु की शनिवार की मौत हुई है। मजदूर न मिलने के कारण दफनाया नहीं जा सका है। रविवार को दफनाया जाएगा। पशु डॉक्टर केवल कोरमपूर्ति कर रहे हैं। इलाज ठीक से नहीं हो रहा है।