बरेली। कोविड टीकाकरण प्रभावित होने की वजह सिर्फ आम लोगों की बेपरवाही नहीं है बल्कि स्वास्थ्य विभाग के नियम भी बन रहे हैं। केंद्रों पर टीकाकरण के लिए 20 से कम लोग होने पर वैक्सीन की बॉयल खोलने से इनकार किया जा रहा है। इस वजह से एक तरफ टीकाकरण केंद्रों पर नोकझोंक हो रही है तो दूसरी तरफ लोग एक से दूसरे केंद्र पर भटकने को विवश हैं। अफसर भी इस समस्या से हाथ झाड़ रहे हैं।
कोरोना की संभावित चौथी लहर के मद्देनजर शासन का बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के टीकाकरण पर जोर है लेकिन टीकाकरण केंद्रों पर पहुंचने वाले लोगों को एक से दूसरे केंद्रों के चक्कर लगवाए जा रहे हैं। वजह वैक्सीन को बरबाद होने से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की मुहिम बताई जा रही है।
रविवार को वीरसावरकर नगर में रहने वाली पूजा 12 साल के बेटे रक्षित को वैक्सीन लगवाने के लिए जिला अस्पताल पहुंची थीं। उन्होंने बताया कि वह दो दिनों से वैक्सीन लगवाने के लिए केंद्रों के चक्कर काट रही हैं। पहले इज्जतनगर अस्पताल गईं तो वहां मौजूद स्वास्थ्यकर्मी ने सिर्फ एक बच्चे के लिए बॉयल खोलने से इनकार कर दिया। इसके बाद दो और स्वास्थ्य केंद्रों पर भी यही कारण बताकर वैक्सीन लगाने से मना कर दिया गया। परतापुर चौधरी के रहने वाले हंसराम भी अपने बेटे को वैक्सीन लगवाने के लिए दो टीकाकरण केंद्रों का चक्कर काटकर जिला अस्पताल में बने स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे थे।
स्लॉट बुकिंग की शर्त समाप्त होने से बढ़ी बरबादी
प्रभारी डीआईओ डॉ. केसी जोशी के मुताबिक बड़ी तादाद में लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए शासन ने पोर्टल पर स्लॉट बुकिंग की शर्त समाप्त कर दी है। अब कोई भी व्यक्ति प्रमाणिक फोटो पहचान पत्र के साथ केंद्र पर पहुंचकर वैक्सीन लगवा सकता है। ऐसे में केंद्र पर कितने पंजीकरण हुए इसकी जानकारी न होने से बॉयल खुलने पर उसके बरबाद होने की आशंका रहती है। इसलिए लोगों को चाहिए कि अगर किसी केंद्र पर बॉयल खुली नहीं है तो वे दूसरे नजदीकी केंद्र पर पहुंचकर वैक्सीन लगवा लें। मुख्य केंद्र जिला अस्पताल में कभी भी वैक्सीन लगवा सकते हैं।
बॉयल खुलने के बाद छह घंटे में उपयोग जरूरी
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का तर्क है कि बॉयल खुलने पर कम से कम छह घंटे के भीतर उसकी सभी डोज का उपयोग होना जरूरी है वर्ना वह बरबाद हो जाएगी। अधिक मात्रा में वैक्सीन बरबाद होने पर कार्रवाई की भी चेतावनी दी गई है। इसी खौफ के चलते स्वास्थ्यकर्मी बॉयल ही नहीं खोल रहे। रिकॉर्ड में केंद्र पर किसी भी व्यक्ति के केंद्र पर वैक्सीन लगवाने के लिए नहीं पहुंचने की सूचना अपलोड कर खानापूरी कर रहे हैं। बता दें कि कोवाक्सिन की एक बॉयल में दस डोज, कोविशील्ड और कोर्बेवैक्स की एक बॉयल में 20-20 डोज होती है। डीआईओ डॉ. केसी जोशी का कहना है कि आए दिन उनके पास ऐसी शिकायत पहुंच रही हैं। वह उच्चाधिकारियों के सामने यह मामला रखेंगे। ताकि लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए भटकना पड़े।