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मेयर ने टेंडर से निकाला ‘चिट्ठी बम’ बीडीए के सिर फोड़ा

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बरेली। मेयर डॉ. उमेश गौतम ने टेंडरों में घपले को लेकर शनिवार को एक चिट्ठी बीडीए वीसी जोगिंदर सिंह को व्हाट्एप से जारी की है। यह दिनभर सुर्खियों में रही। इसमें मेयर ने बीडीए को कटघरे में खड़ा किया है। कहा है कि नगर निगम से ब्लैकलिस्ट कंपनी आदित्य इंजीकॉम ने तथ्य छुपाकर बीडीए से करोड़ों के टेंडर ले लिए हैं। इससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है। साथ ही बीडीए और नगर निगम की साख को भी बट्टा लग रहा है। इस मामले में बीडीए वीसी जोगिंदर सिंह का कहना है कि इस नाम की कोई कंपनी प्राधिकरण में दर्ज नहीं है। मेयर बीडीए की छवि धूमिल कर रहे हैं। उनकी चिट्ठी में कोई दम नहीं है।
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यह है बीडीए के नाम जारी मेयर की चिट्ठी का मजमून
‘आपको अवगत कराना है कि मेसर्स आदित्य इंजीकॉम प्रा. लिमिटेड को दो मार्च, 2020 को नगर निगम की ओर से ब्लैकलिस्ट किया गया था। यह सूचना सभी सरकारी कार्यालयों को भेजी गई थी। मेरे संज्ञान में आया है कि आदित्य इंजीकॉम ने तथ्यों को छुपाकर बरेली विकास प्राधिकरण में निर्माण कार्यों के टेंडर ले लिए हैं। यह कंपनी नगरनिगम ने ब्लैकलिस्ट कर दी है। यदि ऐसी फर्म को बरेली विकास प्राधिकरण की ओर से टेंडर दिए जाते हैं तो प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश सरकार की छवि धूमिल होगी। इस ठेकेदार की कार्यप्रणाली नितांत विवादित और असंतोषजनक है। ब्लैकलिस्ट फर्म को निविदा किन परिस्थितियों में अनुमन्य की गईं। इनके द्वारा संभवत: तथ्यों को छिपाकर गलत आधार से निविदा डालकर कार्य किया जा रहा है, इसलिए इनके विरुद्ध विधिक कार्यवाही की जानी नितांत आवश्यक है। कृपया कृत कार्यवाही से अवगत कराने का कष्ट करें।’
कंपनी ने अफसरों को पैसे देने की कोशिश की, जांच कराएं नगर आयुक्त
मेयर ने कंपनी की ओर से किए गए कार्यों का पूरा विवरण नगर आयुक्त को भी चिट्ठी के जरिए भेजा है। कहा है कि नगर निगम ने वर्ष 2016 में इस कंपनी को कार्य दिया था लेकिन कार्य नहीं किया गया। कई बार नोटिस देने के बाद भी कार्य नहीं हुआ, इसलिए कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया गया। मेयर का कहना है कि उनके संज्ञान में आया है कि कुछ अधिकारियों को पैसे देकर कंपनी ब्लैकलिस्ट सूची से नाम हटवाने की कोशिश कर रही है। इस प्रकरण की जांच करवाएं और ऐसे अधिकारियों को चिह्नित करें।
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जलाकाश कंपनी को मिला है टेंडर
बीडीए की ओर से 60 करोड़ से अधिक के टेंडर जल आकाश कंपनी को टुकड़ों में दिए गए हैं। इसी पर रार छिड़ी है। कुछ लोगोें का आरोप है कि जलाकाश और आदित्य इंजीकॉम कंपनी एक ही व्यक्ति की हैं। लोगों का कहना है कि इस प्रकरण की जांच की आवश्यकता है ताकि असलियत सामने आ सके।
मेसर्स आदित्य इंजीकॉम प्राइवेट लिमिटेड को नगर निगम ने काम न करने पर ब्लैकलिस्ट किया था लेकिन तथ्यों को छुपाकर कंपनी ने बीडीए से करोड़ों के टेंडर ले लिए हैं, इसकी सूचना मिली थी। इस संबंध में हमने बीडीए उपाध्यक्ष को चिट्ठी लिखी है। उनसे कहा है कि इस प्रकरण की जांच कराकर कंपनी के संचालकों पर कठोर कार्रवाई करें ताकि बीडीए, नगर निगम और सरकार की छवि धूमिल न होने पाए। गलत कार्य करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
- डॉ. उमेश गौतम, मेयर
मेयर की ओर से चिट्ठी ऑफिशियल नहीं मिली है। उन्होंने व्हाट्सएप से पत्र भेजा है। इस चिट्ठी में कोई दम नहीं है। जिस कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया गया है, वह बीडीए में पंजीकृत नहीं है। मेयर बीडीए की छवि धूमिल कर रहे हैं। - जोगिंदर सिंह, उपाध्यक्ष बीडीए
हमने बीडीए से टेंडर लिए हैं, लेकिन हमारी कंपनी जलाकाश है। मेसर्स आदित्य इंजीकॉम से कोई ताल्लुक नहीं है। दोनों के निदेशक अलग-अलग हैं। हमारा काम अच्छा है। - मनीष अग्रवाल, प्रोपराइटर, जलाकाश कंपनी
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