बांदा। एसटीएफ के छह जवानों की दस्यु ठोकिया गिरोह द्वारा की गई सामूहिक हत्या के चर्चित प्रकरण में शुक्रवार को इसके आरोपियों ने एक बार फिर अदालत में अपने मुकदमों को शीघ्र निपटाने की गुहार लगाई। आरोपियों ने इस बाबत इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा अलग-अलग दिए गए आदेशों का हवाला भी दिया। अदालत अगली सुनवाई 30 मार्च को करेगी।
यह चर्चित मुकदमा यहां विशेष न्यायाधीश (डकैती) की अदालत में चल रहा है। मौजूदा समय में इसमें कुल 15 आरोपी हैं। इनमें 14 चित्रकूट की जेल और एक बांदा जेल में है। शुक्रवार को पेशी के दौरान 11 अभियुक्तों को कड़े पुलिस पहरे में अदालत में पेश किया गया।
आरोपी कल्याण सिंह ने कहा कि 29 अप्रैल 2013 और 22 अप्रैल 2014 को आरोपियों की रिट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे कि 8 माह के अंदर निस्तारण कर दिया जाए। इसके अलावा 9 जून 2017 को आरोपी रामबाबू पटेल की रिट पर हाईकोर्ट ने फिर दिए आदेश में एक वर्ष में निस्तारण और रोजाना सुनवाई करने का आदेश दिया था।
इसके अलावा अगस्त 2018 में सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई रिट पर 23 सितंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने चार माह के अंदर मुकदमे का निस्तारण करने का आदेश दिया था। आरोपियों ने अदालत से फरियाद की कि 15 वर्षों से जेल में हैं। परिवार बदहाली से जिंदगी गुजार रहे हैं। सभी आरोपियों ने अपने को बेकसूर बताया। विशेष न्यायाधीश ने अगली सुनवाई के लिए 30 मार्च 2022 निर्धारित की है।
गौरतलब है कि जुलाई 2007 में फतेहगंज थाना क्षेत्र के बघोलन तिराहे में दस्यु ठोकिया ने आधी रात के बाद मुठभेड़ से लौट रहे एसटीएफ जवानों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। 6 एसटीएफ जवान और उनके साथ मौजूद एक मुखबिर की मौत हो गई थी। सात अन्य एसटीएफ जवान घायल हो गए थे।
इस घटना के ठीक एक दिन पहले ही मानिकपुर क्षेत्र में एसटीएफ टीम ने ददुआ को उसके कई साथियों के साथ मुठभेड़ में मार गिराया था। शहीद जवानों में हेड कांस्टेबल राजेश चौहान, कांस्टेबल उमाशंकर यादव, ब्रजेश यादव, गिरजा नागर, लक्ष्मण और ड्राइवर कांस्टेबल ईश्वर शामिल थे। मुखबिर मुन्ना भी शामिल था।