बांदा। पंचायती राज विभाग में चुने गए जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी और इनके अफसर व कर्मचारियों के नजदीकी रिश्तेदारों की फर्मों को केंद्रीय वित्त आयोग एवं राज्य वित्त आयोग के बजट से विभिन्न सामग्रियों की आपूर्ति का ठेका नहीं मिलेगा। ये वेंडर के रूप में भी कार्य नहीं कर सकेंगे।
मंडलायुक्त दिनेश कुमार सिंह ने मंडल के बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और महोबा के जिलाधिकारियों को भेजे पत्र में अपर मुख्य सचिव (पंचायती राज) के शासनादेश का हवाला दिया है। कहा कि पंचायती राज विभाग से जुड़े पदाधिकारियों, कर्मियों अथवा उनके नजदीकी रिश्तेदारों की बनाई गई फर्म के रूप में कार्य न करने दिया जाए।
वित्त आयोग के अंतर्गत मैटेरियल, ईंधन, स्टेशनरी व अन्य सामग्री अथवा सेवाओं की आपूर्ति के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष, जिला पंचायत कर्मचारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, क्षेत्र पंचायत प्रमुख, खंड विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी (पंचायत), प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव, पंचायत सहायक, पंचायती राज विभाग के कर्मी और विभाग में संविदा कर्मियों के पारिवारिक सदस्यों व रिश्तेदारों द्वारा स्थापित फर्म/कंपनीज से वेंडर के रूप में कार्य नहीं लिया जाएगा। वित्त आयोग के अंतर्गत पीएफएमएस पर वेंडर के रूप में रजिस्टर्ड फर्म की पृष्ठभूमि की एक बार फिर से जांच कराई जाए। इन निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन हो।
ये रिश्तेदार नहीं ले सकेंगे ठेका
रिश्तेदार का आशय स्पष्ट करते हुए आयुक्त ने पत्र में कहा है कि जिला पंचायत सेवा नियमावली-1970 के अनुसार पिता, पितामह, ससुर, चाचा, मामा, पुत्र, पौत्र, दामाद, भाई, भतीजा, भांजा, सगा चचेरा या ममेरा भाई, पत्नी का भाई, बहनोई, पति का भाई, पति, पति की बहन, पत्नी की बहन, पत्नी, पुत्री, पुत्रवधु, भाभी जो भाई या सगे चचेरे या ममेरे भाई की पत्नी हो, माता, सास, चाची और मामी शामिल हैं।