बलरामपुर। जिले में 34 प्रतिशत आबादी को मनरेगा योजना से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। आधी आबादी को गांव में ही घर बैठे रोजगार उपलब्ध कराया गया है। चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 109 करोड़ की तुलना में जिले में अब तक 59 करोड़ रुपये मनरेगा कार्यों पर खर्च करके गांवों का विकास कराया गया है।
वित्तीय वर्ष बीतने के करीब छह माह में 32.26 के सापेक्ष 16.27 लाख मानव दिवस सृजित हो चुका है। जिले के सभी 800 ग्राम पंचायतों में मनरेगा श्रमिकों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। जिले के 73 श्रमिकों को अब तक 100 दिन का रोजगार दिया जा चुका है।
वित्तीय वर्ष 2021-22 में जिले के 800 ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना से विकास कार्य कराने के लिए 109 करोड़ 16 लाख रुपये श्रम बजट खर्च करने का निर्धारण किया गया है। इस धनराशि से एक वर्ष में 32.26 लाख मानव दिवस का सृजन किया जाएगा।
20 सितंबर 2021 तक जिले के सभी नौ ब्लॉकों में 16.27 लाख मानव दिवस का सृजन कर 58 करोड़ 97 लाख 70 हजार रुपये श्रम बजट खर्च किया जा चुका है। श्रमिकों के मजदूरी पर 33 करोड़ पांच लाख 40 हजार रुपये और मटेरियल व कुशल श्रमिकों पर 24 करोड़ 80 लाख 20 हजार रुपये खर्च किए गए हैं।
सिर्फ मटेरियल पर 42.87 प्रतिशत धनराशि खर्च की गई है। जिले के सभी ग्राम पंचायतों में नदी, नाले व तालाब जैसे प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन पर कार्य किए गए हैं। जिले में मानव दिवस सृजित करने का प्रतिशत 50.42 है।
जिले के 800 ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के 2.60 लाख जॉब कार्डधारक हैं जिसकी तुलना में 1.57 लाख जॉब कार्डों का प्रयोग किया जा चुका है। जिले में पंजीकृत 3.34 लाख मनरेगा श्रमिकों के सापेक्ष 1.83 लाख श्रमिकों ने मनरेगा योजना में कार्य कर रोजगार के अवसर प्राप्त किए हैं।
जिले में अनुसूचित जाति के 17.47 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति के 1.76 प्रतिशत मनरेगा श्रमिक शामिल हैं। डीसी मनरेगा महेंद्र देव पांडेय ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष के दौरान मनरेगा योजना से जिले में 34.2 प्रतिशत महिला श्रमिकों को घर बैठे रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।
मनरेगा योजना से एक परिवार के श्रमिक को औसतन 24.28 प्रतिशत रोजगार दिया गया है। चालू वित्तीय वर्ष के दौरान अब तक जिले के 73 श्रमिकों को 100 दिन का रोजगार दिया जा चुका है।