राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बलिया जिले में गठित छह हजार समूहों से जुड़कर 65 हजार महिलाएं आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इनमें करीब 23 हजार महिलाएं ऐसी हैं, जो समूहों में रोजगार से जुड़ गई हैं और परिवार चलाने में अपना सक्रिय अर्थिक सहयोग भी दे रही हैं।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर समूहों के गठन का कार्य चल रहा है। जिले की महिलाओं को अपना हुनर प्रदर्शित करने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन उचित प्लेटफार्म मुहैया करा रहा है। जिले में अभी तक 6000 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है। इन समूहों में 65000 महिला सदस्य हैं। महिलाओं को निजी तौर पर और समूह में रोजगार दिलाने के प्रयास जारी हैं। अभी तक करीब 18,337 महिलाएं समूहों में शामिल होकर रोजगार से जुड़ी हैं। महिलाओं का हौसला बढ़ाने के लिए विभागीय अधिकारियों का सहयोग मिल रहा है। अभी तक लगभग 3125 स्वयं सहायता समूह से जुड़ी करीब 34,375 महिलाओं को 15-15 हजार रुपये और 1032 समूहों की करीब 11352 महिलाओं को 1.10- 1.10 लाख रुपये अनुदान के रूप में मुहैया कराए जा चुके हैं। महिलाएं समूहों से कर्ज लेकर अपनी खुद की कमाई का स्रोत भी बना रही हैं। महिलाएं मूर्ति, अगरबत्ती, धूपबत्ती, मोमबत्ती के साथ ही बच्चों के खिलौने, गमला बनाकर अपने परिवार की गाड़ी खींच रही हैं।
ड्राई राशन योजना से जुड़ीं 15 हजार महिलाएं
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा संचालित होने वाली विभिन्न योजनाओं में सबसे अधिक महिलाएं ड्राई राशन योजना से जुड़ी हैं। इस योजना के तहत करीब 15000, कोटा दुकान से करीब 550, मनरेगा मेट के तौर पर करीब 786, बीसी सखी में 915 और सामुदायिक शौचालय में 376 महिलाएं जुड़ी हैं। इसके अलावा, कैंटीन, अगरबत्ती, सत्तू, पशुपालन और अन्य व्यक्तिगत दुकान आदि में लगभग 700 महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं।
गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। महिलाएं झिझक छोड़कर बाहर निकल रही हैं। अधिकांश महिलाएं निजी व्यवसाय करना पसंद कर रही हैं। विभाग से हर संभव मदद की जा रही है। - राजीव रंजन सिंह, जिला प्रबंधक, एनआरएलएम, बलिया