कंडक्ट डिसऑर्डर के शिकार हो रहे बच्चे
नोडल अधिकारी मानसिक रोग डॉ. अजेंद्र मलिक बताते है कि 14 साल से कम उम्र के बच्चे कंडक्ट डिसऑर्डर के शिकार हो रहे हैं। इस बीमारी से ग्रस्त बच्चे झूठी कहानी बनाते हैं। गुस्सैल स्वभाव के हो जाते हैं। अगर वह किसी चीज को चाहने लगे तो उसे पाने के लिए हर हद तक पहुंच जाते हैं। बताया कि व्यस्तता के चलते मां-पिता बच्चों से कम ही बातचीत करते हैं। इससे बच्चों और अभिभावकों के बीच बचपन से ही एक दूरी बन जाती है। ऐसी स्थिति में बच्चे सही गलत का फर्क नहीं समझ पाते हैं।
अभिभावकों के लिए सलाह
1- बच्चों को गलती करने पर समझाएं, न की डांटे। छोटी-मोटी सजा का सहारा ले।
2- बच्चों को अधिक समय दें, उनके दिल की बात सुनें। बच्चों को प्यार करें, लेकिन जिद्दी न बनाएं।
3- बच्चों को कभी ऐसा महसूस न होने दे कि वह अभिभावकों पर निर्भर है।
4- बच्चों को खराब संगत से दूर रखें।
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जीआरपी व आरपीएफ द्वारा स्टेशन से पकड़े गए बच्चों का आंकड़ा
वर्ष बालक बालिका कुल
2018 101 25 126
2019 117 21 138
2020 107 12 119
2021 143 6 149