अप्रैल से सितंबर माह में पड़ती है अधिक जरूरत
एसडीओ प्रवेश गिरि ने बताया कि ज्यादातर मामलों में विद्युत ट्रांसफार्मर लो-वोल्टेज या हाई-वोल्टेज के चलते फूंक जाते हैं। अप्रैल, मई, जून, जुलाई, अगस्त व सितंबर माह में बिजली की जरूरत बढ़ने से लोड बढ़ जाता है। ऐसे में कैपेसिटर बैंक बिजलीघरों से घरों में बराबर बिजली पहुंचाने का काम करता है।
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यह बात सही है कि जिन बिजलीघरों पर कैपेसिटर बैंक लगाए गए थे, सभी बंद पड़े हैं। तकनीकी खराबी आने के कारण न तो उन्हें ठीक करने के लिए कोई मैकेनिक मिला और न ही मरम्मत का सामान। न ही कोई ऐसी एजेंसी मिली, जिससे कैपेसिटर बैंक को ठीक कराया जा सके।
- रणविजय सिंह, अधीक्षण अभियंता
कुछ माह तक उक्त कैपेसिटर बैंक चालू रहे, लेकिन फिर बंद हो गए थे। सभी अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंताओं सहित सहायक अभियंताओं को कैपेसिटर बैंक को चालू करने के निर्देश दिए गए थे, यदि ऐसा नहीं हुआ है तो मामला गंभीर है और विभाग का भी नुकसान है। इसे दिखवाया जाएगा।
- राजीव कुमार, चीफ इंजीनियर, मेरठ जोन
पश्चिमांचल के छह जोन व बिजलीघरों की संख्या
जोन बिजलीघर
नोएडा 94
गाजियाबाद 146
बुलंदशहर 177
सहारनपुर 352
मेरठ 229
मुरादाबाद 332