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गन्ने की नर्सरी तैयार कर समूह की महिलाएं बन रही आत्मनिर्भर

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स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गन्ना विकास परिषद ने पहल की है। गन्ना विकास परिषद की ओर से कई गांवों में समूहों की महिलाओं से गन्ने की सिंगल बड और बड चिप विधि से गन्ने के पौध तैयार करवा रहा है। महिलाएं पौधे तैयार कर किसानों को बेच रही हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।
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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत प्लांटों की स्थापना का कार्य किया जा रहा है। महिला सशक्तीकरण एवं स्वावलंबन की दिशा में गन्ना विकास विभाग की यह अनूठी योजना है। इस योजना के अंतर्गत महिला समूह को सिंगल बड और चिप बड विधि से उत्पादित गन्ने की नर्सरी पर प्रत्येक पौध पर 1.30 रुपये एवं बड चिप विधि से 1.50 रुपये का अनुदान गन्ना विकास विभाग की ओर से दिया जा रहा है। इसके लिए कुल 21 समूहों का गठन किया गया है। प्रत्येक समूह में कम से कम 10 व उससे अधिक महिलाएं हैं। इस तरह शुरुआत में 234 महिलाएं रोजगार से जुड़ गई हैं। समूह में शामिल महिलाओं को पहले प्रशिक्षण दिया गया है। महिला स्वयं सहायता समूहों को विभाग एवं गन्ना मिल की ओर से नर्सरी तैयार करने के लिए समस्त सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। पौध तैयार होने पर उन्हें डेढ़ रुपये प्रति पौध के हिसाब से विभाग की ओर से भुगतान किया जाएगा। एक ओर जहां किसान गन्ने की फसल बेचकर आमदनी करेगा, वहीं परिवार की महिलाएं पौध बेचकर अतिरिक्त आय जुटाएंगी।
गन्ने के पौधे तैयार करने का लक्ष्य तय
स्वयं सहायता को सिंगल बड और चिप बड पद्धति से 1050000 गन्ने के पौधे तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है। जिले में कुल 21 समूह हैं जिनसे 234 महिलाएं जुड़ी हैं। इन समूहों को 1050000 पौदे तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है जिसमें 134300 पौधे तैयार किए गए हैं। इनमें 104500 पौधों का वितरण किया जा चुका है।
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जिले में कुल 21 समूहों का गठन किया गया है। इनसे कुल 234 महिलाएं जुड़कर खुद की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। विभाग इसके लिए बेहतर पहल कर रहा है।-अशर्फी लाल, जिला गन्ना अधिकारी आजमगढ़।
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