अभी तक भाजपा ने जिले की आठ विधानसभा सीटों के लिए प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की है, वहीं जिले की अतरौलिया सीट भाजपा-निषाद पार्टी गठबंधन के खाते में है। ऐसे में निषाद पार्टी ने प्रशांत सिंह को अतरौलिया से भी प्रत्याशी घोषित कर दिया है। जिले की एक मात्र मुबारकपुर सीट पर ही भाजपा को प्रत्याशी घोषित करना शेष रह गया है।
विधानसभा चुनाव आते ही राजनीति में महिलाओं की भागीदारी की बात तेज हो गई है। मगर जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जिले के सबसे बड़े विधानसभा क्षेत्र सगड़ी में सिर्फ एक बार महिला को विधायक बनने का मौका मिला। 2017 में वंदना सिंह ने बसपा से जीत दर्ज की थी।
सगड़ी विधानसभा से सबसे पहले 1952 में सोशलिस्ट पार्टी के स्वामी सत्यानंद ने चुनाव जीता था। वहीं उसके बाद 1953 में सोशलिस्ट पार्टी के विश्राम राय ने चुनाव जीता। 1957 में इंद्र भूषण गुप्ता निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीते और पहली बार 1962 में कांग्रेस ने इंद्रासन सिंह के रूप में सगड़ी से चुनाव जीता था।
1967 में मुंशी नर्वदेश्वर लाल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते इसके बाद 1969 में रामकुमार सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। 1974 में राम सुंदर पांडेय कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते और 1977 में रामजन्म यादव जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते। सर्वेश सिंह सीपू की हत्या के कारण 2017 के विधानसभा चुनाव में सर्वेश सिंह सीपू की पत्नी वंदना सिंह बसपा के टिकट से चुनाव जीत कर विधायक बनीं। उन्होंने बसपा से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली है।