फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रेलवे ट्रैक पर हादसों का कारण बने अन्ना मवेशी

विज्ञापन
फोटो-19एयूआरपी-31- कंचौसी स्टेशन के प्लेटफार्म पर बैठे अन्नामवेशी। संवाद - फोटो : AURAIYA
विज्ञापन
दिबियापुर(औरैया)। लगातार हो रहीं दुर्घटनाओं के बाद भी रेलवे ट्रैक पर घूमने वाले अन्ना मवेशियों पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। जिससे बड़े हादसे का खतरा बना रहा है।
विज्ञापन

दिल्ली-हावड़ा रेलवे ट्रैक पर कोरोना काल के बाद लगभग 235 ट्रेनें रोजाना आवागमन करती हैं। इनमें करीब 80 मालगाड़ियां शामिल हैं। ट्रैक किनारे स्थित गांवों के मवेशी अक्सर रेल पटरी पर आ जाते हैं। वहीं पशु पालक भी पटरी के किनारे मवेशियों को चराने पहुंचते हैं। मवेशियों को आने से रोकने के लिए कुछ स्थानों पर जाली लगवाई गई, लेकिन अधिकांश स्थानों पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं।
पिछले वर्ष भी फफूंद और कंचौसी रेलवे स्टेशन के बीच एक खाली मालगाड़ी से पशु टकरा गया था, जिससे गाड़ी डिरेल हो गई थी। अक्सर होने वाले हादसों के बाद भी जिम्मेदार ध्यान नहीं देते हैं। इस संबंध में आरपीएफ फफूंद थाने के प्रभारी दिनेश कुमार ने बताया कि रेल ट्रैक के किनारे गांवों में अभियान चलाकर पशुपालकों को जागरूक किया जाएगा। ताकि उनके जानवर ट्रैक पर जाकर रेल संचालन में बाधा न बनें।
विज्ञापन

कंचौसी। कंचौसी रेलवे स्टेशन पर बीकानेर-हावड़ा ट्रेन के यात्रियों का घंटों इंतजार के बाद सब्र का बांध टूट गया। अधिकारियों से ट्रैक बहाल होने की सही जानकारी न मिल पाने पर काफी संख्या में यात्री सहायक स्टेशन अधीक्षक के कक्ष में घुस गए। यहां पर जानकारी के दौरान यात्रियों की सहायक स्टेशन अधीक्षक विशंभर दयाल पांडेय से नोकझोंक होने लगी। मामला बढ़ता देख जीआरपी पुलिस फफूंद ने स्थानीय पुलिस की मदद से हंगामा कर रहे यात्रियों को शांत कराया।
ओएचई लाइन ठीक होने के बाद गुरुवार सुबह से धीमी गति से ट्रेनें गुजारी गईं। रात में कंचौसी स्टेशन से पहले कई जगहों पर खड़ी माल गाड़ियों को सुबह नौ बजे धीरे-धीरे ही चलाया गया।
रेल सूत्रों के मुताबिक बुधवार देर रात तक ओएचई लाइन ठीक न होने से दिल्ली से पूर्वी राज्यों को जाने वाली कई राजधानी एक्सप्रेस रूट बदल कर शिकोहाबाद वाया मैनपुरी, कन्नौज, कानपुर सेंट्रल से निकलीं। वहीं नये रेलवे ट्रैक डीएफसी से बीच में खड़ी ट्रेनों को निकालने का प्रयास भी हुआ लेकिन कानपुर सेंट्रल स्टेशन का ट्रैक से जुड़ाव न होने के कारण सवारी ट्रेनों को नहीं गुजारा जा सका।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें