अंबेडकरनगर। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से शुक्रवार को लखनऊ में हुई पूर्व मंत्रियों रामअचल राजभर व लालजी वर्मा की मुलाकात ने जिले की सियासी सरगर्मी अचानक बढ़ा दी। बसपा से निकाले जाने के बाद इन दोनों वरिष्ठ नेताओं के अगले राजनीतिक कदम को लेकर चला आ रहा उहापोह का दौर भी इसके साथ छंट गया। जल्द ही इन दोनों नेताओं का सपा में शामिल होना तय हो गया है। इसका सीधा असर जहां अंबेडकरनगर जनपद की सभी पांच विधानसभा सीटों पर पड़ेगा, वहीं आसपास के जनपदों में भी इस फैसले का प्रभाव देखने को मिल सकता है।
बीते पंचायत चुनाव के दौरान बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने जिले के दो वरिष्ठ नेताओं अकबरपुर विधायक रामअचल राजभर व कटेहरी विधायक लालजी वर्मा को अचानक पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इससे न सिर्फ बसपा कार्यकर्ता वरन अन्य राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता व आम लोग स्तब्ध रह गए थे। फैसले के विरोध में न सिर्फ अंबेडकरनगर जनपद वरन आसपास के तमाम जनपदों समेत प्रदेश के अन्य हिस्सों में काम कर रहे बसपा कार्यकर्ताओं व नेताओं ने त्याग पत्र दे दिया था। इसके बाद से ही इन दोनों नेताओं के अगले राजनीतिक कदम को लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे थे।
तमाम प्रयासों के बाद भी सामान्य तौर पर पूर्व मंत्री रामअचल राजभर व लालजी वर्मा द्वारा खुले तौर पर कोई संकेत नहीं दिया जा रहा था। इससे लोगों के बीच उत्सुकता और बढ़ने लगी थी। आम तौर पर यह आकलन सबसे ज्यादा मजबूत था कि दोनों नेता सपा में शामिल होंगे, लेकिन बीच-बीच में उनके भाजपा, कांग्रेस व आप में शामिल होने की भी चर्चाएं चलती रहीं। राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए ही आम लोगों के बीच तरह-तरह के कयास लगातार चलते रहे। हालांकि सपा के कई नेता अंदरखाने लगातार इन दोनों नेताओं से संपर्क में बने रहे। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से उनकी बात भी कराई गई, लेकिन सब कुछ गोपनीय ढंग से चलता रहा।
इस बीच शुक्रवार को लखनऊ में दोनों पूर्व मंत्रियों की सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की खबर व फोटो सामने आते ही जिले की राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई। कुछ देर में ही यह खबर तेज से फैल गई। सपा कार्यकर्ताओं ने जहां इसका बढ़-चढ़कर स्वागत किया वहीं भाजपा व बसपा कार्यकर्ताओं के बीच संभावित समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई। आम तौर पर माना जा रहा कि लंबा राजनीतिक अनुभव रखने वाले इन दोनों नेताओं के आगामी दिनों में सपा में शामिल होने के चलते जिले की सभी पांच विधानसभा सीटों पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।