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यूपी: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बोले-राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में अपनाई जाए विश्व की सर्वोत्तम शिक्षा प्रणाली

Sat, 11 Sep 2021 06:10 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में आयोजित भव्य समारोह में उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय और अधिवक्ता चैंबर का शुभारंभ किया। इस दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में विश्व की श्रेष्ठतम शिक्षा प्रणाली अपनाई जाए। 
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इलाहाबाद हाईकोर्ट में समारोह को संबोधित करते राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राष्ट्रपति ने संगमनगरी की भूमि को शिक्षा के केंद्र के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि इस शहर की प्रमुख पहचान शिक्षा के केंद्र के रूप में रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण भूमिका तथा शिक्षा के क्षेत्र में प्रयागराज की महत्ता को देखते हुए इस विधि विश्वविद्यालय के लिए प्रयागराज को सर्वोत्तम स्थान के रूप में चुना गया है। इस विश्वविद्यालय का निर्माण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कराने की उन्होंने इच्छा जताई।

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राष्ट्रपति ने इस विश्वविद्यालय के लिए जमीन उपलब्ध कराने के लिए मुख्य न्यायधीश और उनकी टीम की सराहना की। साथ ही राज्यपाल आनंदीबेन पटेेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी सक्रिय पहल के लिए बधाई दी। कहा कि हमारी व्यवस्था के निर्माण में गुणवत्ता पूर्ण लीगल एजुकेेशन का महत्वपूर्ण योगदान है। हमारे देश में नॉलेज सुपर पावर बनने की महात्वाकांक्षा नीति को कार्यरूप दिया जा रहा है। इसी संदर्भ में उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय विवि के निर्माण और विकास को और बढ़ाया जाना चाहिए।

विश्वस्तरीय विधि शिक्षा हमारी प्राथमिकताओं में एक है। 12 के बाद ही किशोर और युवा विधि कक्षाओं में दाखिला लेते हैं। जैसा कि इंजीनियरिंग और मेडिकल संस्थानों में पहले से ही ऐसा होता रहा है। ऐसे बच्चे विधि शिक्षण संस्थाओं में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर दिया जाए। किसी भी संस्थान के लिए आरंभ में ही सभी पद्धतियों को सुविचारित रूप से स्थापित करना अपनेक्षाकृत सरल होता है। व्यवस्था के निर्मित होने के बाद उसमें सुधार की प्रक्रिया जटिल होती जाती है।

इसलिए इस विधि विश्वविद्यालय के आरंभ से ही विश्व के सर्वश्रेष्ठ विधि विश्वविद्यालयों की पद्धतियों और प्रणालियों  अध्ययन करके श्रेष्ठतम व्यवस्थाओं को अपनाया जाए। इस विश्वविद्यालय में शुरू से ही छात्राओं और शिक्षिकाओं के समान प्रतिनिधित्व पर भी जोर दिया जाना चाहिए। आधुनिक सुविधाओं के निर्माण, विद्यार्थियों के चयन, अध्यापकों की नियुक्त्ति, पाठ्यक्रम के निर्धारण तथा  राज्य की श्रेणियों के चयन आदि सभी आयामों में विश्व की श्रेष्ठ पद्धतियों का एक विश्वस्तरीय संस्थान का निर्माण करना चाहिए। कानून को सामाजिक और आर्थिक प्रगति और बदलाव के रूप में देखा जाना चाहिए। मेरी शुभकामना है कि यहां केविद्यार्थी न्यायपूर्ण सामाजिक, आर्थिक प्रगति में अपनी भूमिका निभाएं।
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किरण रिजिजू - फोटो : social media
केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि हम चाहते हैं कि भारत दुनिया का केंद्र बने। हमारी न्याय व्यवस्था आम नागरिक तक पहुंचे। हम आम नागरिकों तक समय सीमा के भीतर न्याय पहुंचाने के लिए प्रयासरत हैं। 
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