शिशुओं में होते हैं दो प्रकार के हार्निया
इनगुइनल हार्निया : इस प्रकार के हार्निया का पता चलते ही डॉक्टर सर्जरी करने की सलाह दे सकते हैं, क्योंकि इस मामले में आंत के इनगुइनल कैनल में फंसने का डर रहता है। ऐसा होने पर आंत में होने वाला रक्त प्रवाह रुक सकता है, जिससे आंत क्षतिग्रस्त हो सकती है। ऐसे ही दो मामले हाल ही में चिल्ड्रेन अस्पताल में आए थे, जिसमें एक शिशु चार माह का और दूसरा आठ माह का था। इन दोनों में इनगुइनल हार्निया की समस्या थी। इनका आनन-फानन ऑपरेशन करना पड़ा था।
अम्बिलिकल हार्निया : अधिकतर मामलों में अम्बिलिकल हार्निया की समस्या शिशु के तीन-चार वर्ष का होने तक अपने आप ठीक हो जाती है। अगर यह हार्निया समय के साथ बढ़ता जाता है और दबाने पर भी वापस अंदर नहीं जाता तो डॉक्टर इस अवस्था में अम्बिलिकल हार्निया को ठीक करने के लिए सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। सर्जरी के दौरान मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए सिंथेटिक जाल भी लगाया जाता है। इससे हार्निया को फिर से बाहर निकलने से रोका जा सकता है।
माता-पिता को चाहिए कि वे धूम्रपान न करें, क्योंकि इसका असर बच्चे की सेहत पर पड़ता है। इसके अलावा मां को गर्भावस्था के दौरान प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन का भरपूर सेवन करना चाहिए। - डॉ. डी कुमार, सर्जन, एसआरएन हॉस्पिटल