पिछले 22 साल से लाइसेंस निरस्त करने के आदेश पर रोक लगी है। इसके दुरुपयोग का सबूत नहीं तो लाइसेंस निरस्त करना उचित नहीं है। हाईकोर्ट ने यह आदेश याची सुधाकर मिश्र की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि शस्त्र का दुरुपयोग नहीं किया गया है तो केवल आपराधिक केस दर्ज होने की वजह से शस्त्र लाइसेंस निरस्त करना मनमाना व विधि विरुद्ध है। कोर्ट ने कहा कि दो परिवारों की दुश्मनी के चलते दोनों तरफ से कई लोगों की हत्या की जा चुकी है। ऐसे में अब भी जीवन को खतरा बरकरार है।
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पिछले 22 साल से लाइसेंस निरस्त करने के आदेश पर रोक लगी है। इसके दुरुपयोग का सबूत नहीं तो लाइसेंस निरस्त करना उचित नहीं है। हाईकोर्ट ने यह आदेश याची सुधाकर मिश्र की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी द्वारा शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने व मंडलायुक्त द्वारा अपील खारिज करने के आदेशों को रद कर दिया है। याची के अधिवक्ता का कहना था कि 18 मई 1989 को आपराधिक पृष्ठभूमि के कारण याची का शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिया गया। आयुक्त वाराणसी ने इसके खिलाफ अपील भी खारिज कर दी। याची के भाई दिवाकर मिश्र का भी शस्त्र लाइसेंस निरस्त किया गया था।