इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजमगढ़ में तैनात दो पुलिस कांस्टेबलों के वेतन से अधिक भुगतान की वसूली का आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि वसूली का आदेश जारी करने से पूर्व याची कांस्टेबलों को उनका पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। वसूली से उन पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा इसलिए सुनवाई का अवसर देना जरूरी है। कांस्टेबल दिनेश चंद्र त्रिपाठी और भरत सिंह की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने याची के अधिवक्ता निर्भय कुमार भारती को सुनकर दिया है।
याची के अधिवक्ता का कहना था कि याचीगण के वेतन निर्धारण में विभाग की ओर से गलती की गई। इसके बाद अधिक भुगतान की वसूली का आदेश जारी कर दिया गया। ऐसा करने से पूर्व याचीगण का पक्ष नहीं सुना गया। कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश सरकार से जवाब मांगा था। दाखिल जबाव में कहा गया कि यदि याचीगण का पक्ष सुन भी लिया जाए तो इससे रिकवरी आदेश पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। कोर्ट का कहना था कि सरकार के जवाब से स्पष्ट है कि याचीगण को उनका पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। रिकवरी आदेश का उन पर सिविल प्रभाव पड़ेगा इसलिए उनको अपना पक्ष रखने का अवसर देना जरूरी है। कोर्ट ने सात जुलाई 2020 को पारित रिकवरी आदेश रद़द कर दिया है। तथा याचीगण का पक्ष सुनकर नए सिरे से आदेश पारित करने की छूट दी है।