लॉकडाउन में बंद हो गया था काम
रविकांत दवाओं की ट्रेडिंग का काम करते थे। एक साल पहले कोरोना के चलते लॉकडाउन में काम बंद हो गया। इस पर रविकांत परिवार को लेकर वापस आ गया। कमला नगर के ए-ब्लाक स्थित फूल वाटिका में किराए पर रह रहे थे।
रवि फुव्वारा बाजार से थोक में दवाओं को खरीदकर मेडिकल स्टोर और क्लीनिक पर देते थे। मगर, कामधंधा ठीक नहीं चलने पर आर्थिक तंगी के चलते मानसिक तनाव में थे। सोमवार दोपहर को वह घर से निकले। शाम तकरीबन सात बजे तक नहीं लौटने पर पत्नी चंचल ने फोन किया।
फोन एक राहगीर ने उठाया। कहा कि जिसका फोन है, वह बल्केश्वर घाट पर बेहोश पड़ा है। मुंह से झाग निकल रहे हैं। इस पर पत्नी और परिजन पहुंच गए। रविकांत को एक अस्पताल में लेकर गए। मगर, डॉक्टर ने भर्ती नहीं किया। इस पर एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी ले गए। यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मंगलवार की सुबह शव का अंतिम संस्कार करने लगे।
थाना कमला नगर के प्रभारी निरीक्षक नरेंद्र शर्मा ने बताया कि पुलिस कंट्रोल रूम पर सूचना मिलने पर बल्केश्वर घाट पर पुलिस पहुंची थी। अधजली लाश को निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पत्नी ने चार पन्नों का एक नोट दिया है। इसमें बाजार में पैसा फंसने की वजह से रविकांत के तनाव में होने की बात कही गई है। आशांका है कि व्यापारी ने विषाक्त पदार्थ खाकर जान दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
सुसाडड नोट में लिखे दवा व्यापारियों के नाम
पुलिस को पत्नी ने पति का चार पन्नों का एक सुसाइड नोट दिया है। इसकी जांच की जा रही है। इस पर रविकांत का नाम लिखा है। इसमें आत्महत्या करने की बात कही गई है। इसमें कई दवा व्यापारियों के नाम है। इसमें करोड़ों का हिसाब किताब लिखा है।
किससे कितनी रकम लेनी है और किसको देनी है, यह बात लिखी गई है। इसके साथ ही बाकी बची हुई रकम पत्नी को देने के लिए कहा है। एक व्यापारी पर 50 लाख, जबकि दूसरे पर 14 लाख रुपये तक बकाया बताया हैं। जिसमें आगरा, राजकोट, पोरबंदर आदि जिलों के व्यापारी हैं। दो व्यापारियों पर रकम बकाया होने की वजह से मरने की बात लिखी है।