भगवान सिंह को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तरफ से ताम्रपत्र भेंट करके सम्मानित किया था
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उनके सुपुत्र अनेक सिंह ने बताया कि पिता के देहांत के समय पर वह करीब 14 साल के थे। पिताजी बताते थे कि अंग्रेजों ने उन्हें जेल में रखकर कई सालों तक प्रताड़ित किया। देश की स्वतंत्रता पिताजी का सपना था। वह कहते थे कि मैं जब अपना शरीर त्यागूं तो वह दिन स्वतंत्रता दिवस हो। यदि ऐसा हुआ को मेरा जीवन धन्य हो जाएगा।
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पिताजी का यह सपना पूरा हुआ। पिता जी 15 अगस्त 1988 को इस संसार से विदा हुए। आज हम सभी सात भाइयों को अपने पिताजी की गौरव गाथा पर गर्व है। बताया कि इसके बाद कुछ वर्षों बाद 30 मई 2013 को हमारी वीरांगना मां धर्मपत्नी सफेदी देवी भी इस दुनिया को अलविदा कह गईं। उनके सबसे छोटे बेटे मातेंद्र सिंह आज ऑटो चलाकर परिवार का पालन पोषण करते हैं।