मैनपुरी। सारस संरक्षण और मैनपुरी में पर्यटन को विकसित करने के लिए तैयार किया गया सारस सर्किट अब यूपी टूरिज्म की वेबसाइट पर नजर आएगा। मंडलायुक्त आगरा मंडल की पहल पर पर्यटन विभाग ने सारस सर्किट को शामिल किया है। तत्कालीन सीडीओ ईशा प्रिया की पहल पर तैयार किए गए सारस सर्किट को पूरे देश में अब पहचान मिलेगी।
सैकड़ों सालों से मैनपुरी की धरती सारसों का ठिकाना रही है। सारसों के इसी अटूट प्रेम के चलते पूरे देश में सारसों की सबसे अधिक आबादी मैनपुरी में पाई जाती है। जिले के किशनी और करहल ब्लॉक में इनकी संख्या सर्वाधिक है। इसके पीछे कारण यहां वेटलैंड्स की अधिकता है। इसे ही और विकसित करते हुए 678 हेक्टयेर क्षेत्रफल में आईएएस अधिकारी और तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया ने सारस सर्किट बनाया था।
इसके तहत वेटलैंड्स की खोदाई करने के साथ ही वॉचटावर निर्माण आदि कार्य कराए गए थे। हाल ही में चार अगस्त को मंडलायुक्त आगरा मंडल अमित गुप्ता ने इसका उद्घाटन किया था। इसके बाद उन्होंने यूपी टूरिज्म की वेबसाइट पर इसे स्थान देने के लिए पर्यटन विभाग को पत्र भेजा था। इसी पत्र का संज्ञान लेते हुए पर्यटन विभाग ने सारस सर्किट को अपनी वेबसाइट पर स्थान दिया है। यूपी टूरिज्म की वेबसाइट से सारस सर्किट की वेबसाइट को लिंक कर दिया गया है। यूपी में पर्यटन के लिए आने वाले पर्यटकों को सारस सर्किट का ब्योरा एक क्लिक पर मिलेगा। इससे सारस सर्किट को पूरे देश में पहचान मिलेगी।
सारस सर्किट के निर्माण का सपना तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया ने देखा था। उन्होंने अथक प्रयास कर वेटलैंड्स को पहले कब्जामुक्त कराया। इसके बाद मनरेगा के तहत इनकी खोदाई कराई गई। इतना ही नहीं सारस सर्किट को बढ़ावा देने के लिए वैटलैंड्स के किनारे वॉच टॉवर का निर्माण भी कराया गया। इतना ही नहीं सारस सर्किट का नक्शा तैयार कर उसे आगरा लखनऊ एक्सप्रेस-वे के करहल कट पर भी लगवाया, ताकि सैलानियों को परेशानी न हो। बीते तीन अगस्त को उनका तबादला मुख्य विकास अधिकारी रायबरेली के पद पर हो गया है, लेकिन सारस सर्किट में की गई उनकी मेहनत अब रंग लाने लगी है।