वृंदावन (मथुरा)। राजा महेंद्र प्रताप की 42वीं पुण्यतिथि सादगी के साथ मनाई गई। यमुना किनारे स्थित समाधि स्थल और प्रेम महाविद्यालय में उनकी प्रतिमा के समक्ष उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। राजा साहब की मूर्ति एवं समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए वक्ताओं ने भारत सरकार मांग की है कि जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए उन्हें भारत रत्न दिया जाए।
बृहस्पतिवार को आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. देव प्रकाश ने कहा कि त्यागमूर्ति राजा महेंद्र प्रताप ने मात्र 23 वर्ष की उम्र में भारत की जनता को अंग्रेजों से मुक्ति और जनता को शिक्षित करने और व्यवसायिक प्रशिक्षण के लिए टेक्निकल कॉलेज की स्थापना अपने राजमहल में कराई। 28 वर्ष की उम्र में मथुरा के तत्कालीन डीएम को चैलेंज देकर विदेश को चले गए कि वे अब तभी इस जमीन पर कदम रखेंगे जब भारत स्वतंत्र हो जाएगा। राजा साहब अपने प्रण के अनुसार ही 15 अगस्त 1947 को लगभग 32 वर्ष बाद वृंदावन लौटकर आए थे। ब्राह्मण महासभा के संस्थापक पंडित सुरेश चंद्र शर्मा ने भी विचार रखे। पुरातन छात्र ब्रजेश शर्मा ने राजा साहब के लिए प्रेम धर्म का पाठ किया।
इस मौके पर अध्यक्ष महेश भारद्वाज, ब्रज मोहन खंडल, डोरी लाल, सुनील गौतम, वंशी तिवारी, रामनारायण ब्रजवासी, विपिन बिहारी व्यास, सुनील गौतम आदि उपस्थित थे। संयोजन ब्रज शोध संस्थान के प्रकाशन अधिकारी गोपाल शरण शर्मा और वरिष्ठ प्रवक्ता शिव अधार सिंह यादव ने संचालन किया।