प्रताप चंद ने बताया कि 19 अक्तूबर को उनके पास नोटिस आया तो वह दंग रह गया। नोटिस भेजने वाला आयकर विभाग भी ई-रिक्शा चालक की हालत देखकर भी इसे कारोबारी नहीं मान रहा था। बावजूद ई-रिक्शा चालक की फाइल में करोड़ों की खरीद-फरोख्त का उल्लेख है। चालक ने दो पेज की शिकायत एसएसपी के नाम थाना हाइवे पुलिस को दी। एसएसपी डॉ.गौरव ग्रोवर ने बताया कि पुलिस को जांच करने के आदेश दिए हैं और दिल्ली में जिस स्थान पर कंपनी रजिस्टर्ड है, वहां के बारे में जानकारी के लिए टीम गई है। फिलहाल जांच की जा रही है।
फर्जी बैंक एकाउंट भी खोले गए होंगे
टैक्स एडवोकेट अतुल्य शर्मा ने बताया कि अगर फर्जी कंपनी खोली गई है तो इसमें फर्जी तरीके से बैंक एकाउंट भी खोला गया है। क्योंकि इतना बड़ा कारोबार दिखाने के लिए बैंक एकाउंट की भी जरूरत होती है। एकाउंट की जांच की जाए तो पता चल सकता है कि किस-किस ने कंपनी के साथ कारोबार किया है। फर्जी कार्य करने वाले एक तरह से दलाल के रूप में भी काम करते हैं, जिनके साथ लिखित में कुछ नहीं होता है और किसी दूसरी कंपनी के मार्फत सामान को इधर-उधर भेजकर कमाई करते हैं और टैक्स चोरी के साथ ही मोटी दलाली भी खाते हैं। जो सही फर्में होती हैं, उन्हें सिर्फ सस्ता सामान लेने से मतलब होता है, किसने भेजा , कहां से आया, इससे उनका संबंध नहीं होता है। फर्जी काम करने वाले कभी-कभी अपने नौकरों को भी कंपनी में डायरेक्टर बना लेते हैं और करोड़ों का कारोबार करते हैं। समय पर टैक्स जमा होता रहे और लेन देन में विवाद न हो तो ऐसे फर्जी काम को पकड़ना मुश्किल होता है। इस तरह से लोग कई फर्जी फर्में बना लेते हैं और करोड़ों का कारोबार करने के बाद फर्म को बंद भी कर देते हैं।
मथुरा: आयकर विभाग ने रिक्शा चालक को भेजा लाखों का नोटिस, जांच में दिल्ली का निकला जीएसटी नंबर