आगरा में आयोजित एक कार्यक्रम में बच्चों की दिनचर्या, उनकी आदतों, फोन एडिक्शन को लेकर चर्चा की गई। इसमें कई बड़े संस्थानों के विभागाध्यक्ष व डॉक्टरों ने हिस्सा लिया। उन्होंने बच्चों में सुधार, उन्हें एडिक्शन से दूर रखने के लिए कई तरह के उपाय बताए। जिन्हें अपनाकर अध्यापक व पैरेंट्स बच्चों में सुधार ला सकते हैं।
डॉ. विवेक ने कहा कि शिक्षकों को अभिभावकों के साथ समय-समय पर जागरूक करना चाहिए। उन्हें बताना चाहिए कि घर में बच्चों के सामने संवाद सजगता से करें। बच्चे परिवार के संवाद से ही सीखते हैं। उन्होंने बताया कि इस समय बच्चों में ध्यान की कमी, मोबाइल व इंटरनेट के अधिक इस्तेमाल, तनाव के मामले सामने आ रहे हैं। सबसे पहले समस्या की वजह पता करना चाहिए। उसे पहचानकर समाधान के लिए कदम उठाना चाहिए। मनोचिकित्सक से परामर्श प्राप्त किया जा सकता है।
तमाम बच्चे तनावग्रस्त हो रहे हैं। उन्हें पढ़ाई थोपी जा रही है। स्कूल की पढ़ाई के बाद कोचिंग जाना होता है। बच्चों को गाने सुनने दें, डांस, खेलकूद की गतिविधियों में शामिल होने दें। कोशिश करें कि बच्चा घर के बाहर जाकर दोस्तों के साथ खेले। कहानियां पढ़ने के लिए दें। सत्र की अध्यक्षता सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. जेपी नारायण व इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. एनएन राजू ने किया। एसएन मेडिकल कॉलेज की डॉ. कश्यपी गर्ग ने किशोरावस्था में मानसिक स्वास्थ्य के प्रबंधन पर शिक्षकों की भूमिका पर विचार व्यक्त किया। कार्यक्रम में डॉ. राकेश भाटिया, डॉ. विशाल सिन्हा आदि की उपस्थिति रही।
सर गंगाराम हॉस्पिटल, नई दिल्ली के मनोचिकित्सक डॉ. दीपक गुप्ता ने ‘स्कूलों में बच्चों के खराब प्रदर्शन’ पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि स्कूलों में बच्चों की सही समय पर पहचान की जानी चाहिए। चंचल बच्चों को डांटने के बजाय उनकी ऊर्जा को सही दिशा में लगाना चाहिए। उन्हें जिम्मेदारियां दी जानी चाहिए। कक्षा में आगे बैठाना चाहिए। इससे उनकी ऊर्जा सही दिशा में लग सकेगी।