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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय: लंबित पुनर्परीक्षाएं 25 जून से, ओएमआर आधारित होगी परीक्षा

Mon, 14 Jun 2021 12:38 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजीव कुमार के मुताबिक बीएससी, बीकॉम, बीकॉम (वोकेशनल) प्रथम व द्वितीय वर्ष, एमकॉम प्रथम व अंतिम वर्ष, एमए गणित, एमएससी अंतिम वर्ष, एमएससी कृषि अंतिम वर्ष की परीक्षाएं आरबीएस कॉलेज में होंगी। ये परीक्षाएं 29 जून तक चलेंगी। 
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रमों की पुनर्परीक्षाओं का कार्यक्रम जारी कर दिया है। आरबीएस और सेंट जोंस कॉलेज पर 25 जून से परीक्षाएं कराई जाएंगी। परीक्षा ओएमआर आधारित होगी। प्रश्नपत्र को हल करने की अवधि दो घंटे की निर्धारित की गई है। तीन पाली में परीक्षा कराई जाएगी।  

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परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजीव कुमार के मुताबिक बीएससी, बीकॉम, बीकॉम (वोकेशनल) प्रथम व द्वितीय वर्ष, एमकॉम प्रथम व अंतिम वर्ष, एमए गणित, एमएससी अंतिम वर्ष, एमएससी कृषि अंतिम वर्ष की परीक्षाएं आरबीएस कॉलेज में होंगी। ये परीक्षाएं 29 जून तक चलेंगी। वहीं, बीए प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष (बाकी) और एमए द्वितीय वर्ष की पुनर्परीक्षाएं सेंट जोंस कॉलेज में कराई जाएंगी। ये परीक्षाएं 28 जून को संपन्न होंगी।  

जनसंपर्क अधिकारी प्रो. प्रदीप श्रीधर के मुताबिक प्रत्येक पाली में 400 से 500 परीक्षार्थी होंगे। सामाजिक दूरी का पालन कराते हुए और कोरोना संक्रमण के संबंधित दिशा-निर्देशों का पालन कराते हुए परीक्षाएं कराई जाएंगी। छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जाकर परीक्षा का कार्यक्रम देख सकते हैं। सभी संबद्ध कॉलेजों की लॉगिन आईडी पर भी परीक्षा का कार्यक्रम अपलोड कर दिया गया है। 

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प्रायोगिक परीक्षा के साक्ष्य समय से न देने पर चार महीने परिणाम विलंब हुआ   
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने मौखिक परीक्षाएं एक से 15 जुलाई के बीच कराए जाने की योजना बनाई है। इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य की गई है। 15 अगस्त मुख्य परीक्षाएं समाप्त होनी है और 31 अगस्त तक परिणाम देने का निर्णय लिया गया है। शैक्षणिक सत्र 2019-20 में प्रायोगिक परीक्षा के साक्ष्य कॉलेजों की ओर से न दिए जाने से चार महीने परिणाम विलंब हो गया था।     

सत्र 2019-20 की परीक्षा में वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य की गई थी। कॉलेजों को छूट दी गई कि वह आसपास के कॉलेजों से परीक्षक बुलाकर प्रायोगिक परीक्षा करा लें। प्राप्तांक वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ विवि को उपलब्ध करा दें। अधिकतर कॉलेजों ने समय से अंक साक्ष्यों (रिकॉर्डिंग) के साथ नहीं भेजे। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से प्रत्येक कॉलेज को तीन से चार बार नोटिस जारी किया गया। अक्तूबर तक परिणाम लटका रहा। विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी प्रो. प्रदीप श्रीधर का कहना है कि इस वर्ष सख्ती के साथ मौखिक परीक्षा की वीडियो रिकॉर्डिंग मंगाई जाएगी। समय से उपलब्ध न कराने वाले कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

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