हाईकोर्ट को लेकर आंदोलन
- 25 सितंबर 2001 को नला चंद्रभान, फरह में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह की जनसभा में काले झंडे दिखाए गए थे।
- 26 सितंबर 2001 को पुलिस ने दीवानी में घुसकर लाठीचार्ज किया था। इसमें अधिवक्ता, कर्मचारी और न्यायिक अधिकारी घायल हुए थे। इसकी जांच जस्टिस गिरधर मालवीय आयोग ने की। उन्होंने पुलिस के खिलाफ रिपोर्ट दी।
- 21 दिसंबर 2012 को अधिवक्ताओं ने खंडपीठ की मांग को लेकर ताजमहल का घेराव किया।
- 19 दिसंबर 2014 को दिल्ली के जंतरमंतर पर प्रदर्शन किया गया।
हाईकोर्ट बेंच हमारा अधिकार
पूर्व डीजीसी वरिष्ठ अधिवक्ता करतार सिंह भारतीय ने कहा कि हाईकोर्ट बेंच आगरा में बनना हमारा अधिकार है। केंद्रीय राज्यमंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल को बयान देने के बजाय बेंच बनाने के लिए पहल करें तो स्वागत योग्य है। केंद्र और राज्य सरकारें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कार्यरत हैं। संवैधानिक अड़चन दोनों सरकारों को दूर करनी हैं।
केंद्रीय राज्यमंत्री से उम्मीद
पश्चिम उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण जनमंच के अध्यक्ष चौधरी अजय सिंह ने कहा कि केंद्रीय राज्यमंत्री से आगरा की जनता को काफी उम्मीद है। इसके बावजूद उनका हाईकोर्ट बेंच को लेकर प्रस्ताव भिजवाने का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। जस्टिस जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट में आगरा को हाईकोर्ट बेंच के लिए उपयुक्त स्थान घोषित किया जा चुका है।
बेंच के लिए प्रस्ताव की आवश्यकता नहीं
युवा अधिवक्ता संघ के मंडल अध्यक्ष नितिन वर्मा ने कहा कि हाईकोर्ट बेंच के लिए किसी प्रस्ताव की आवश्यकता नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार को पूर्व में पत्र भेजा था। जस्टिस जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट में आगरा और मेरठ में से एक को चुनने को कहा गया था। आगरा को उपयुक्त स्थान माना था। आम जनता को मेरठ तक जाने के लिए काफी वाहन बदलने होंगे।
आगरा में हों बेंच की स्थापना
आगरा एडवोकेट एसोसिएशन के सुनील शर्मा ने कहा कि हाईकोर्ट बेंच की स्थापना के लिए अगारा सहित संपूर्ण पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता और जनता आंदोलन कर चुके हैं। स्वस्थ एवं सुलभ न्याय दिलाने के लिए सरकार को आगरा में बेंच की स्थापना करानी चाहिए। इसके लिए किसी प्रस्ताव की भी आवश्यकता नहीं है।