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आगरा जोंस मिल प्रकरण: धड़ल्ले से हो रहे हैं बैनामे, बाबू जांच रहे सिर्फ स्टांप

Fri, 03 Sep 2021 01:38 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा

सार

जोंस मिल में जलमग्न, नहर व तालाब की भूमि पर बहुमंजिला इमारत खड़ी हो गई। दुकान, मकान व मॉल बन गए। इनके बैनामे में यह तथ्य छिपाए गए कि जमीन सरकारी हैं।
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जोंस मिल में पड़ा मलबा (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा की जोंस मिल में शहर का सबसे बड़ा जमीन घोटाला हो गया। 23 खसरों की जांच की गई तो 2596.57 करोड़ रुपये कीमत की संपत्तियां खुर्दबुर्द मिलीं थीं। तब से डीएम ने 11 खसरों में बैनामों पर रोक लगा रखी है। बाकी 12 खसरों में बैनामे जारी हैं। 

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जिन तथ्यों पर बैनामे दर्ज किए जा रहे हैं, उन तथ्यों की तस्दीक की कोई व्यवस्था नहीं है। रजिस्ट्री दफ्तर के बाबू और उप निबंधक बैनामों में सिर्फ स्टांप मूल्य जांच रहे हैं। इससे तथ्य छिपाकर प्रतिबंधित खसरों के बैनामे की आशंका है। पहले भी तथ्य छिपाकर ही जमीन खुर्दबुर्द की गई है।

सदर तहसील के मौजा घटवासन में जोंस मिल है। 7 जुलाई 2020 को मिल नंबर-4 में बम विस्फोट हुआ। जिसके बाद 29 जुलाई को डीएम प्रभु एन सिंह ने जोंस मिल की 23 खसरों की जमीन पर काबिज भूमाफिया की जांच एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव से कराई। 23 खसरों में करीब 101 बीघा जमीन है। 
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इसमें 107.51 करोड़ रुपये की वह नजूल भूमि भी शामिल है, जिसे तत्कालीन कलक्टर ने शर्तों के तहत जोंस परिवार को दिया था। जांच में 2596.57 करोड़ रुपये कीमत की संपत्तियां खुर्दबुर्द मिलने पर दिसंबर 2020 में डीएम प्रभु एन सिंह ने 23 खसरों में से 11 खसरों में जमीन की खरीद-फरोख्त, बिजली-पानी कनेक्शन, नक्शा पास करने पर प्रतिबंध लगा दिया। 

सुराग: जहां रोक, वहां का हो रहा मूल्यांकन
निबंधन विभाग के अनुसार जिन 11 खसरों में जमीनों की खरीद-फरोख्त पर रोक हैं। उनमें जमीनों के मूल्यांकन के लिए आवेदन आ रहे हैं। ऐसे दो आवेदन रजिस्ट्री दफ्तर में आए हैं। सर्किल रेट के आधार पर अनौपचारिक रूप से जमीन की मालकियत भी तय की गई हैं। 

शंका: निबंधन कार्यालय में हो सकता है ‘खेल’
नौ महीने से यहां प्रतिबंध जारी है। परंतु निबंधन कार्यालय में ‘खेल’ की आशंका है। जांच में शामिल अन्य 12 खसरों में धड़ल्ले से बैनामे हो रहे हैं। खसरा नंबर छिपाकर प्रतिबंधित खसरे का बैनामा हो जाए, तो उसकी जांच के लिए भी यहां कोई व्यवस्था नहीं है। पेश हो रहे दस्तावेज कूटरचित तो नहीं ये भी नहीं जांचा जा रहा है। निबंधन विभाग सिर्फ स्टांप कमी जांच रहा है। बाकी अन्य तथ्यों को नजरअंदाज किया जा रहा है। 

साजिश: तथ्य छिपाकर बेची गई थी जमीन
जोंस मिल में जलमग्न, नहर व तालाब की भूमि पर बहुमंजिला इमारत खड़ी हो गई। दुकान, मकान व मॉल बन गए। इनके बैनामे में यह तथ्य छिपाए गए कि जमीन सरकारी हैं। दाखिला खारिज के समय जब बैनामों की फाइल तहसीलदार कार्यालय पहुंची तो जांच में यह बात सामने आई थी। जिसके बाद दाखिल खारिज आवेदन निरस्त कर दिए। इस मामले में हाईकोर्ट ने भी खरीददार के विरुद्ध आदेश जारी किया था।

शातिर: रजिस्टर से फाड़े थे पन्ने
एडीएम प्रशासन की जांच में एक हैरान करने वाली बात भी सामने आई थी। जिस रजिस्ट्री दफ्तर में अब बैनामे हो रहे हैं उसके रिकॉर्ड रूम में भूमाफिया ने सेंध लगाई थी। जिन दस्तावेजों के आधार पर मालिकाना हक जताया जा रहा था, रजिस्ट्री दफ्तर के रिकॉर्ड रूम में उन बैनामों के जिल्द रजिस्टर से पन्ने गायब मिले। इन्हें रजिस्टर से फाड़ा गया था।

शिकंजा: तीन भूमाफिया हो चुके हैं घोषित
जोंस मिल की जमीन को बिना किसी हक-हकूक के बेचने व खुर्दबुर्द करने के आरोप में राजेंद्र प्रसाद उर्फ रज्जो जैन, हिमांशु अग्रवाल उर्फ चुनमुन और कंवलदीप सिंह को जिलाधिकारी द्वारा भूमाफिया घोषित किया जा चुका है। 
तीनों के खिलाफ लेखपाल ने एफआईआर कराई थी। इनके अलावा गंभीरमल पांडया, हीरा लाल पाटनी व मुन्नी लाल मेहरा के विधिक वारिसों सहित 20 अधिक लोगों को दोषी मानते हुए एडीएम प्रशासन ने भूमाफिया घोषित करने की संस्तुति की थी।
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इन खसरों की हुई थी जांच 
जोंस मिल के खसरा नंबर 1735, 1736, 1737, 1738, 1739, 1740, 1741, 2065, 2068, 2070, 2071, 2072, 2076, 2077, 2078, 2079, 2080, 2082, 2084, 2087, 2088, 2089, 2090 की जांच प्रशासन ने कराई थी। इन 23 खसरों में करीब 101 बीघा जमीन है। 

इन खसरों में लगाई रोक
23 खसरों की जांच के बाद डीएम प्रभु एन सिंह ने 11 खसरों में जमीन विक्रय पर रोक लगाई है। जिनमें खसरा नंबर 1734, 1737, 1739, 1741, 2078, 2079, 2080, 2081, 2085, 2086, 2087 शामिल हैं।

दलीलः हमारा काम स्टांप जांचना
निबंधन विभाग के सहायक महानिरीक्षक एसके सिंह ने बताया कि जिन 11 खसरों में प्रतिबंध है उन्हें छोड़कर बाकी में खसरों में बैनामे हो रहे हैं। दस्तावेज में जो तथ्य होते हैं हम उन तथ्यों के आधार पर ही बैनामा दर्ज करते हैं। हमारा काम स्टांप मूल्य जांचना है। स्टांप कमी नहीं होनी चाहिए। 

आर्थिक अपराध शाखा कर रही है मामले की जांच
जोंस मिल मामले की दोबारा जांच अब आर्थिक अपराधा शाखा कर रही है। भूमाफिया हिमांशु अग्रवाल उर्फ चुनमुन की पत्नी के आवेदन पर शासन ने जांच ईडब्लयूएस को सौंपी है। प्रशासन ने जांच पूरी होने के बाद भूमाफिया के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई थी।
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