डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
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आगरा में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों में 15 जुलाई से छात्रों के प्रवेश लिए जाएंगे। अंतिम तिथि 30 अगस्त निर्धारित की गई है। एक और बड़ा फैसला यह लिया गया है कि कॉलेजों में संचालित पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा विश्वविद्यालय प्रशासन नहीं कराएगा। कॉलेज खुद मेरिट के आधार पर छात्र-छात्राओं का प्रवेश लेंगे। कॉलेज भी प्रवेश परीक्षा नहीं करा सकते हैं।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अशोक कुमार मित्तल की अध्यक्षता में मंगलवार को बृहस्पति भवन में प्रवेश परीक्षा समिति की बैठक में कई निर्णय लिए गए। इसमें तय किया गया स्नातक पाठ्यक्रमों में 15 जुलाई से 20 अगस्त तक और परास्नातक पाठ्यक्रमों में एक अगस्त से 30 अगस्त तक प्रवेश लिए जाएंगे।
अब विश्वविद्यालय में ऑनलाइन होगी प्रवेश प्रक्रिया, कोरोना के कारण की जा रही नई व्यवस्था
गत तीन सत्रों से विश्वविद्यालय प्रशासन आवासीय परिसर में संचालित पाठ्यक्रमों के साथ संबद्ध कॉलेजों के एमएससी के सभी विषयों, एमएड, बीपीएड, एलएलबी, एलएलएम, बीएससी कृषि आदि पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा कराकर विद्यार्थियों का आवंटन करता था।
कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस व्यवस्था में बदलाव किया गया है। कॉलेजों को ही मेरिट के आधार पर प्रवेश लेना है। विश्वविद्यालय प्रशासन निगरानी करेगा। देखा जाएगा कि कहीं नियम विपरीत प्रवेश तो नहीं लिए जा रहे। बैठक में कुलसचिव अंजनी कुमार मिश्रा, वित्त अधिकारी एके सिंह, प्रो. अनिल वर्मा, प्रो. मनु प्रताप सिंह, औटा अध्यक्ष मुकेश भारद्वाज, महामंत्री डॉ. निशांत चौहान, प्रीति जौहरी, निर्मला यादव मौजूद रहे।
10 जुलाई से होगा वेब रजिस्ट्रेशन
विश्वविद्यालय से संबंद्ध कॉलेजों में प्रवेश के लिए सभी छात्र-छात्राओं का विश्वविद्यालय में वेब रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी प्रो. प्रदीप श्रीधर ने बताया कि वेब रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 10 जुलाई से शुरू होगी।
कॉलेजों को ऑनलाइन आवेदन लेने हैं
प्रवेश परीक्षा समिति की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि कॉलेजों को प्रवेश के लिए छात्रों से ऑनलाइन माध्यम से ही आवेदन फॉर्म भरवाने होंगे। प्रवेश से पहले छात्रों के प्रमाणपत्रों की ऑफलाइन जांच करनी होगी। परीक्षा प्रभारी एक दिन में 15 से 20 छात्रों को बुलाकर प्रमाणपत्रों का सत्यापन कर लेंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन सॉफ्टवेयर बनवाएगा
कॉलेजों में कितनी सीटें भरी और कितनी खाली रह गईं, इसकी जानकारी के लिए विश्वविद्यालय की ओर से सॉफ्टवेयर बनवाया जाएगा। कॉलेजों के समन्वयक जानकारी जुटाई जाएगी।