हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस अब राहुल गांधी के चुनाव फार्मूले से पीछे हटने लगी है। इसका कारण लोकसभा चुनाव में हार भी है। अब युवा कांग्रेस भी संगठनात्मक स्तर पर अपने ढांचे में सुधार की दिशा में बढ़ रही है।
युवा कांग्रेस के चुनाव पहले पंचायत, ब्लॉक, जिला और प्रदेश स्तर पर आयोजित होते रहे हैं। मगर राष्ट्रीय कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के निर्देश पर जिला स्तरीय कांग्रेस कमेटियों को खत्म कर दिया गया।
इनमें ब्लॉक, संसदीय क्षेत्र और राज्य स्तर की कार्यकारिणी के चुनाव करवाए गए। चुनाव प्रक्रिया में भी वोट के आधार पर कार्यकारिणी के पदाधिकारियों का चुनाव किया गया।
पुराने ढांचे में लौटी कांग्रेस
सबसे अधिक वोट लेने वाला प्रत्याशी अध्यक्ष, उससे कम उपाध्यक्ष और फिर महासचिव बनें। मगर अब लोकसभा चुनाव में हुई कांग्रेस पार्टी की हार के बाद युवा कांग्रेस भी राहुल गांधी के इस फार्मूले को छोड़ पुराने चुनावी ढांचे को अपनाने जा रही है।
इसके लिए युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी मंथन चल रहा है। संगठनात्मक ढांचे में जिला स्तरीय कमेटी की अहमियत को अब महसूस किया जा रहा है।
वहीं, ग्रास रूट पर युवाओं को जोड़ने के लिए युकां पंचायत स्तर पर चुनाव न करवा कर मनोनयन की प्रक्रिया को अपनाएगी। जिससे हर वर्ग के युवाओं को संगठन में प्रतिनिधित्व दिया जा सकेगा।
पंचायत स्तर पर चुनाव नहीं, अब होगा मनोनयन
युकां में युवाओं को अधिक से अधिक प्रतिनिधित्व देने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर चुनाव के बजाय मनोनयन किया जाएगा।
युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि संसदीय क्षेत्र कमेटी के बजाय जिला स्तरीय कमेटी के लिए चुनाव होंगे। इस बारे में तीन बार राहुल गांधी से मिलकर विचार विमर्श किया गया है।