हिमाचल के पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल के खिलाफ फिर विजिलेंस जांच खुल गई है। प्रदेश सरकार पूर्व मुख्यमंत्री धूमल को बख्शने के मूड में नहीं लग रही है। स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने उस पैनकार्ड मामले में पूर्व सीएम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, जिसे वह बंद कर चुकी थी।
विजिलेंस ने तब माना था कि उसे पैनकार्ड मामले में सबूत नहीं मिले हैं। वहीं, इस नोटिस से धूमल खासे नाराज हैं। कांग्रेस ने विपक्ष में रहते हुए पूर्व भाजपा सरकार के दौरान भ्रष्टाचार संबंधी 48 मामलों को लेकर चार्जशीट तैयार की थी।
इस मामले को भी उठाया था। सत्ता में आने के बाद कांग्रेस ने विजिलेंस को इन मामलों पर जांच के आदेश दिए थे।
प्रारंभिक जांच में नहीं मिले थे सबूत
प्रारंभिक जांच में विजिलेंस को दूसरा पैनकार्ड होने के पुख्ता सबूत नहीं मिले थे। इसी आधार पर इसे बंद करने की सिफारिश की गई थी। विजिलेंस ने धूमल से एक से ज्यादा पैनकार्ड रखने के आरोप में कुछ सवालों के जवाब स्पष्ट करने को कहा है। फिलहाल मामले की फिर जांच खुल गई है।
प्रेम कुमार धूमल ने 29 नवंबर, 2007 को जब बमसन से अपना नामांकन पत्र भरा था तब उन्होंने जो शपथपत्र दिया था उसमें कई खामियां थीं। शपथपत्र में उन्होंने जहां अपना पैननंबर गलत दिखाया है। वहीं एचयूएफ का पैन नंबर भी गलत है।
इसी तरह धूमल ने लोकायुक्त के समक्ष जो हल्फिया बयान पेश किया है अगर उसे सही माना जाए तो प्रेम कुमार धूमल और उनके बेटे अनुराग ठाकुर ने अपनी करोड़ों की संपत्ति छुपाई है। पंजाब विजीलेंस ब्यूरो की रिपोर्ट भी इस ओर संकेत करती है।
विजिलेंस की हो रही किरकिरी
कुछ दिन पहले ही जांच कर रही विजिलेंस ने पूर्व सीएम के खिलाफ पैन कार्ड मामला बंद करने की सिफारिश की थी। विजिलेंस के तत्कालीन आईजी ने मीडिया के साथ बातचीत में स्वीकार किया था कि जांच में कोई भी पुख्ता सबूत सामने नहीं आए।
इससे इसमें कोई आपराधिक मामला बनता हो। अमर उजाला ने इस बारे में जब विजलेंस के डीआईजी और प्रवक्ता अरविंद शारदा से पूछा तो उनका दो टूक जवाब था कि- मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
'सरकार खुद घिरी है, मुझे क्या घेरेगी?'
उधर, पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल का कहना है कि विजिलेंस ने यह जांच किस आधार पर खोली है, इसकी जानकारी विजिलेंस के अफसर ही बेहतर बता पाएंगे।
जहां तक मुझे घेरने का सवाल है तो भला कांग्रेस सरकार मुझे कैसे घेरेगी, सरकार तो खुद ही घिरी हुई है। गौरतलब है कि विजिलेंस पहले भी पूर्व सीएम को प्रश्नावली भेजकर पूछताछ करती रही है।
हालांकि, एचपीसीए से लेकर दूसरे किसी भी मामले में कोई बड़ी कार्रवाई करने में जांच एजेंसी अभी तक नाकाम ही रही है।