महिला एवं बाल विकास विभाग की एकीकृत बाल सुरक्षा योजना के तहत अब 18 साल से कम आयु के अनाथ या असहाय बच्चों का पालन-पोषण करने वाले दंपति एवं रिश्तेदार को हर महीने 2 हजार रुपये नकद और 300 रुपये एफडी (फिक्स डिपॉजिट) मिलेगी। यह लाभ तभी मिलेगा, जब दंपति बच्चे का बेहतर पालन-पोषण करेंगे।
इस योजना का उद्देश्य यह है कि अनाथ बाल-बालिकाओं को पारिवारिक माहौल में पाला जा सके। ऐसी व्यवस्था के बाद इस प्रकार के अनाथ आश्रमों में रहने को बाध्य नहीं होंगे। परिवार में रखने के लिए प्रक्रिया जिला कार्यक्रम अधिकारी की ओर से निर्धारित फार्म-16 एवं 17 अनुबंध के अनुसार तैयार की जाएगी। योजना में 31 मार्च 2016 तक 250 बच्चे लाभान्वित हो चुके हैं।
योजना वर्ष 2012 में शुरू हुई थी। महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त निदेशक सुषमा वत्स ने बताया कि योजना का उद्देश्य अनाथ और असहाय बच्चों को भी पारिवारिक परिवेश देना है। इस योजना के तहत आगे आने वाले लोगों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता भी दी जाएगी।
योजना के लिए पात्रता
1. दंपति एवं बच्चा दोनों हिमाचल के स्थायी निवासी हों
2. दंपति की आयु 105 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए
3.परिवार की ओर से एडॉप्ट करने की कोई आयु नहीं है
4. दंपति या परिवार की मासिक आय 5000 रुपये से कम नहीं होनी चाहिए
5. दंपति को बच्चों को पालने का अनुभव होना चाहिए
6. दंपति मानसिक, शारीरिक एवं भावनात्मक वृत्ति से स्वस्थ हो
सहायता राशि प्राप्त करने की प्रक्रिया- हिमाचल प्रमाण पत्र जो राजस्व अधिकारी अर्थात तहसीलदार के पद से कम से कम जारी हो। वहीं, आयु का प्रमाण जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र और दसवीं का सर्टिफिकेट इत्यादि। इसके अलावा दंपति का फोटोग्राफ, आय प्रमाण पत्र और चिकित्सा प्रमाण पत्र देना होगा।
31 मार्च तक 250 बच्चे हो चुके हैं लाभान्वित
जिला=======लाभान्वित बच्चे
बिलासपुर====7
चंबा=======32
हमीरपुर=====68
कांगड़ा======24
कुल्लू======36
किन्नौर===== -
लाहौल-स्पीति= -
मंडी=======39
शिमला=====16
सिरमौर=====13
सोलन======4
ऊना=======11