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1813 करोड़ की परियोजना से शिमला शहर को 24 घंटे मिलेगी पेयजल आपूर्ति, कैबिनेट ने समझौता पैकेज के प्रारूप को दी मंजूरी

Tue, 24 Aug 2021 04:13 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

शिमला जल आपूर्ति और मल निकासी परियोजना के मुख्य उद्देश्य वर्ष 2050 तक पानी की मांग को पूरा करने के लिए सतलुज नदी से अतिरिक्त 67 एमएलडी के साथ शिमला जल आपूर्ति में संवर्द्धन, विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण कुफरी, शोघी, घणाहट्टी और अतिरिक्त योजना क्षेत्र के लिए 2050 तक शिमला नगर निगम क्षेत्र में सभी घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए सप्ताह भर 24 घंटे जलापूर्ति और शिमला नगर निगम क्षेत्र में बेहतर मलनिकासी सेवाएं प्रदान करना है।
 
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शिमला शहर(फाइल) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश कैबिनेट ने शहरी विकास विभाग की ओर से विश्व बैंक और भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के साथ समझौता  पैकेज के प्रारूप को मंजूरी दी ताकि ग्रेटर शिमला क्षेत्र में जल आपूर्ति योजना सेवाओं में सुधार के लिए शिमला जलापूर्ति एवं सीवरेज सेवा वितरण कार्यक्रम के वित्तपोषण के लिए विश्व बैंक के माध्यम से 250 मिलियन डॉलर (1813 करोड़ रुपये) का वित्त पोषण किया जा सके। कुल राशि में से विश्व बैंक 160 मिलियन डॉलर (1160.32 करोड़ रुपये) की वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। शेष राशि 90 मिलियन डॉलर (652.68 करोड़ रुपये) का वहन हिमाचल सरकार की ओर से किया जाएगा। बैठक में प्रधान सचिव शहरी विकास विभाग को विश्व बैंक के साथ समझौता पैकेज को अंतिम रूप प्रदान करने और हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत किया गया।

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 शिमला जल आपूर्ति और मल निकासी परियोजना के मुख्य उद्देश्य
शिमला जल आपूर्ति और मल निकासी परियोजना के मुख्य उद्देश्य वर्ष 2050 तक पानी की मांग को पूरा करने के लिए सतलुज नदी से अतिरिक्त 67 एमएलडी के साथ शिमला जल आपूर्ति में संवर्द्धन, विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण कुफरी, शोघी, घणाहट्टी और अतिरिक्त योजना क्षेत्र के लिए 2050 तक शिमला नगर निगम क्षेत्र में सभी घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए सप्ताह भर 24 घंटे जलापूर्ति और शिमला नगर निगम क्षेत्र में बेहतर मलनिकासी सेवाएं प्रदान करना है।
 
क्या है योजना
इस परियोजना में शिमला जिले की सुन्नी तहसील के शकरोड़ी गांव के पास सतलुज नदी से पानी उठाने की योजना बनाई गई है जिसमें संजौली में 1.6 किलोमीटर की ऊंचाई तक उठाने और 22 किमी की पाइप बिछाने से 67 एमएलडी पानी की वृद्धि शामिल है। इस परियोजना के अंतर्गत नगर निगम शिमला में वितरण पाइप नेटवर्क को सप्ताह भर 24 घंटे जलापूर्ति प्रणाली में स्तरोनन्त करने का भी प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, शिमला के मैहली, पंथाघाटी, टूटू और मशोबरा क्षेत्रों में मलनिकासी प्रणाली प्रदान की जाएगी। यह राज्य के लिए एक प्रमुख परियोजना होगी जो शिमला में बेहतर जलापूर्ति और मलनिकासी प्रणाली प्रदान करने का प्रयास करेगी और वर्ष 2050 तक शहर की आवश्यकताओं को पूरा करेगी। हिमाचल प्रदेश सरकार का शहरी विकास विभाग कोविड-19 के कारण उत्पन्न वित्तीय बाधाओं के बावजूद विश्व बैंक और वित्त मंत्रालय से इस निधि को प्राप्त करेगा।
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वहीं शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि शिमला जल आपूर्ति और मल निकासी परियोजना का मकसद शिमला व साथ लगते क्षेत्रों में आने वाले समय के लिए पानी की मांग को पूरा करना है। शहर को 67 एमएलडी अतिरिक्त पानी पहुंचाने के लिए यह परियोजना प्रस्तावित है। अगले 30 वर्षों को ध्यान में रख कर यह योजना बनाई गई है। सभी औपचारिकताएं जल्दी ही पूरी कर ली जाएंगी। शिमला को 24 घंटे पानी मिले यह मेरा वायदा भी था और पायलट प्रोजेक्ट के रूप में जल्दी पूरा भी होगा। पूरी तरह से समस्या को दूर करने में यह प्रोजेक्ट कारगर सिद्ध होगा। 

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