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पीएम मोदी पांच नवंबर को हिमाचल की शक्तिपीठों के करेंगे वर्चुअल दर्शन

Mon, 01 Nov 2021 05:07 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी , मंडी

सार

उपायुक्त मंडी अरिंदम चौधरी ने बताया कि प्रधानमंत्री के लाइव कार्यक्रम के लिए बाबा भूतनाथ मंदिर में पूरी व्यवस्था की जा रही है। बाबा भूतनाथ मंदिर के लाइव दर्शनों के बाद विश्व पटल पर मंडी को पहचान मिलेगी। हिमाचल प्रदेश में मां चिंतपूर्णी, श्री नयनादेवीजी, ज्वालाजी, बज्रेश्वरी देवी कांगड़ा और चामुंडा नंदिकेश्वर धाम शक्तिपीठ हैं।
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बाबा भूतनाथ के लाइव दर्शन करेंगे पीएम। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दीपावली के बाद पांच नवंबर को गोवर्धन पूजा के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंडी के प्रसिद्ध मंदिर बाबा भूतनाथ समेत प्रदेश के मंदिरों और शक्तिपीठों के लाइव दर्शन करेंगे। ज्वालाजी शक्तिपीठ में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी मौजूद रहेंगे। इसी दिन प्रधानमंत्री का उत्तराखंड के केदारनाथ जाने का भी कार्यक्रम है। उपायुक्त मंडी अरिंदम चौधरी ने बताया कि प्रधानमंत्री के लाइव कार्यक्रम के लिए बाबा भूतनाथ मंदिर में पूरी व्यवस्था की जा रही है। बाबा भूतनाथ मंदिर के लाइव दर्शनों के बाद विश्व पटल पर मंडी को पहचान मिलेगी। हिमाचल प्रदेश में मां चिंतपूर्णी, श्री नयनादेवीजी, ज्वालाजी, बज्रेश्वरी देवी कांगड़ा और चामुंडा नंदिकेश्वर धाम शक्तिपीठ हैं। इसके अलावा शिव मंदिर बैजनाथ और बाबा भूतनाथ का भी भव्य मंदिर है। इसके अलावा भी देवभूमि में कई प्रतिष्ठित मंदिर हैं।  

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मंडी में बन रहा भव्य दिव्य शिव धाम
छोटी काशी मंडी में शिव धाम भी बन रहा है, जो भव्यता और दिव्यता में किसी अजूबे से कम नहीं होगा। मंडी के कांगणीधार में साढ़े नौ हेक्टेयर क्षेत्र में बनने वाला उत्तर भारत का यह पहला ऐसा धार्मिक पर्यटन स्थल होगा जो बाहर से आने वाले पर्यटकों के अलावा स्थानीय लोगों के आकर्षण का केंद्र होगा। 

यह है बाबा भूतनाथ का इतिहास
मंडी के अधिष्ठाता बाबा भूतनाथ का इतिहास करीब पांच सौ साल पुराना है। वर्ष 1527 में अजबर सेन ने बाबा भूतनाथ मंदिर के साथ आधुनिक मंडी शहर की स्थापना की थी। मंडी भगवान भोले शंकर की कर्मभूमि के रूप में भी विख्यात है। पौराणिक मान्यता के अनुसार पर्वतराज की पुत्री पार्वती को विदा कर ले जाते समय भगवान शिव को संसार का ध्यान आया तो वे बरातियों के साथ ही नई नवेली दुलहन को वहीं छोड़ कर तपस्या में लीन हो गए। शिव के वापस न आने पर पार्वती रोने लगीं, उसके विलाप को सुनकर पुरोहित आगे आया। उसने शिव का आह्वान करने के लिए मंडप की स्थापना की गई। मंडप में प्रकट होकर भगवान शिव ने कहा कि उन्हें क्यों बुलाया गया है। इस पर पुरोहित ने कहा कि आपकी याद में रोते-रोते पार्वती सो गई हैं। तभी से इस स्थान का नाम मंडप से मांडव्य और फिर मंडी पड़ा। यहां भोलेनाथ स्वयंभू शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए हैं।

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