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लाइनों में धक्के खा रहे मरीज, फर्श पर बैठकर होता है डॉक्टर का इंतजार

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आईजीएमसी में मरीजों की संख्या बढ़ने के बावजूद नहीं बढ़ी सुविधाएं,
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12 सौ मरीजों की होती थी पहले ओपीडी
35 सौ मरीजों की होती है अब ओपीडी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में 20 सालों में मरीजों की संख्या तो बढ़ी लेकिन सुविधाएं नहीं। आज भी मरीजों को घंटों लाइनों में धक्के खाने के बाद डॉक्टर के पास चेकअप करवाना पड़ता है। इसके बाद मरीज फिर टेस्ट करवाने के लिए लंबी लाइनों में खड़ा हो जाता है।
मरीज कई सालों से यह दिक्कतें झेल रहे हैं लेकिन किसी भी सरकार और स्थानीय नेता ने इनके समाधान के प्रयास नहीं किए। फर्श पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते आज भी मरीज अस्पताल में नजर आ जाते हैं। बीमारी से परेशान मरीजों को यह समस्याएं रुलाने को मजबूर कर देती हैं लेकिन सरकारों के दिल नहीं पसीज रहे।
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आईजीएमसी में सीटी स्कैन, एमआरआई, रिनल स्कैन और डीएसए टेस्ट तक की महंगी मशीनें स्थापित हो चुकी हैं। लेकिन मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण अब मशीनें भी बढ़ानी होंगी। पहले आईजीएमसी में केवल एक हजार से लेकर 12 सौ तक की ओपीडी रहती थी। अब बढ़कर तीन हजार से 35 सौ तक हो गई है। लोगों का कहना है कि अस्पताल में सुविधाएं बढ़ानी होंगी।
प्रदेश के निचले हिस्सों से भी आते हैं मरीज
अस्पताल में सुपर स्पेशिलिटी विभाग भी है। शिमला, मंडी, बिलासपुर, कांगड़ा, हमीरपुर, चंबा और सोलन तक के मरीज यहां उपचार करवाने आते हैं। 9 सौ बिस्तरों वाले इस अस्पताल में औसतन 12 सौ मरीज दाखिल रहते हैं। कुछ वार्डों में एक बिस्तर पर दो-दो मरीज दाखिल हैं। मेडिसिन की ओपीडी में सबसे ज्यादा भीड़ होती है लेकिन डॉक्टरों की कमी के चलते कई बार मरीजों को दूसरे दिन आकर चेकअप करवाना पड़ता है। एसआर लैब के बाहर भी यही स्थिति है।
पुरानी सीटी स्कैन मशीन से दिक्कत
2010 में स्थापित सीटी स्कैन मशीन पर 24 घंटे सात दिन काम होता है। लेकिन मशीन के आउटडेटिड होने के बावजूद भी प्रबंधन नई मशीन नहीं ले पाया है। स्थिति यह है कि महीने में एक हफ्ते यह मशीन खराब रहती है। प्रबंधन दरवाजे पर नंबर लिख कर छोड़ देता है कि मशीन ठीक होने पर ही संपर्क करें। ऐसे में आपात स्थिति में इलाज करवाने आए मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ता है।
एमआरआई की दो माह
बाद की मिल रही डेट
आईजीएमसी में आज भी मरीजों को सीटी स्कैन और एमआरआई टेस्ट की डेट दो माह बाद की दी जाती है। कारण मरीजों की संख्या अधिक है तथा उपकरण कम। आजकल टेस्ट की डेट लेने आ रहे मरीजों को 8 फरवरी और 15 फरवरी की दी डेट दी जा रही है।
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नई मशीन की टेंडर प्रक्रिया पूरी
आईजीएमसी प्रबंधन का कहना है कि नई सीटी स्कैन मशीन को लेकर टेंडर समेत अन्य औपचारिकताएं पूरी हो गई हैं। प्रबंधन का दावा है कि अस्पताल में जब दो मशीनें हो जाएंगी तो एक मशीन से इमरजेंसी और दूसरी मशीन पर रूटीन के टेस्ट किए जाएंगे। हालांकि मशीन कब तक आएगी इसकी किसी को जानकारी नहीं है।
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