विवि प्रशासन से छात्र संगठनों ने की छात्रावास आवंटन प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग
क्रॉसर
एसओपी के अनुसार कक्षाएं चलाने को किया है अधिकृत
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय परिसर में अब धीरे-धीरे छात्र-छात्राओं की आवाजाही बढ़ने लगी है। ऑफलाइन कक्षाओं का दौर भी शुरू हो चुका है। हालांकि अभी कक्षाओं में उपस्थिति कम है लेकिन सोमवार से यह संख्या बढ़ सकती है। ऑफलाइन कक्षाओं को पहले की तरह संचालित करने में सबसे बड़ी अड़चन छात्रावासों का आवंटन पूरा न होना है। एसएफआई के इकाई अध्यक्ष विवेकराज और सचिव रॉकी ने विवि प्रशासन से हास्टल आवंटन प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की है। कहा कि छात्रावास की आवंटन प्रक्रिया पूरी होते ही कक्षाओं में हाजिरी बढ़ जाएगी।
विज्ञान के साथ कला और एमबीए जैसे विभागों ने वेबसाइट के माध्यम से ऑफलाइन कक्षाओं का टाइम टेबल भी जारी कर दिया है। हिमाचल विवि ने हालांकि अभी तक ऑफलाइन कक्षाओं को शुरू करने के आदेश जारी नहीं किए हैं लेकिन समस्त विभागों को उपलब्ध क्लास रूम के आधार पर कक्षाएं चलाने के लिए अधिकृत कर दिया है। इसके बाद विभागों के चेयरमैनों और निदेशकों ने कक्षाएं शुरू कर दी हैं।
विवि के चीफ वार्डन कार्यालय ने पीजी कोर्स में प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश पाने वाले छात्र-छात्राओं को छात्रावासों के लिए ऑनलाइन आवेदन करने और पुराने छात्रों को रिन्यू के लिए तय की समय सीमा के कारण छात्रावास आवंटन की प्रक्रिया लंबित पड़ी है। हजारों विद्यार्थी छात्रावास मिलने के बाद ही कक्षाओं में नियमित हाजिरी लगा पाएंगे। विवि के एमबीए और विज्ञान संकाय के साथ हिंदी, लोक प्रशासन सहित प्रोफेशनल संस्थानों में कक्षाएं शुरू हो गई हैं।
लैब में नियमित रूप से आ रहे विद्यार्थी
विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय के कोर्स की लेबोरेटरी में छात्र प्रैक्टिकल करने और शोध के बचे कार्यों को पूरा करने के लिए नियमित रूप से आ रहे हैं। शिक्षक भी शोधार्थियों के शोध कार्यों को दिसंबर तक पूरा करवाने के लिए हर तरह से मार्गदर्शन कर रहे हैं।
पुस्तकालयों में कम पड़ने लगी बैठने को जगह
विवि के पुस्तकालयों में पीजी की परीक्षाएं समाप्त होने पर छात्र अब पुस्तकालयों में आकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए आने लगे हैं। छात्र-छात्राओं की बढ़ी संख्या और पुस्तकालयों में 50 फीसदी क्षमता के साथ बैठने की व्यवस्था के चलते छात्रों को बैठने के लिए जगह कम पड़ रही है। छात्र संगठन अब पुस्तकालयों को सौ फीसदी क्षमता के साथ खोलने की मांग करने लगे है।