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किन्नौर: सतलुज पर बने हैं 22 बिजली प्रोजेक्ट, निर्माण से खोखले हो रहे हैं पहाड़

Thu, 12 Aug 2021 01:46 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

पहाड़ों की बनावट कुछ ऐसी है कि इनमें बरसात में काफी ज्यादा नमी उत्पन्न होती है। ये पहाड़ छोटी-छोटी चट्टानों के टुकड़ों और मिट्टी से बने हैं।
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किन्नौर निगुलसरी में भूस्खलन: रेस्क्यू में जुटे जवान। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर के पहाड़ बिजली प्रोजेक्टों के निर्माण से खोखले हो रहे हैं। लगातार ब्लास्टिंग बढ़ने से किन्नौर जिले में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं। किन्नौर में सतलुज नदी के बेसिन पर 22 बिजली प्रोजेक्टों का निर्माण किया गया है। इसके अलावा सड़कों के निर्माण के लिए होने वाले ब्लास्ट से भी पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। किन्नौर जिले के अधिकांश पहाड़ अति संवेदनशील हैं। बरसात के दौरान यह सबसे ज्यादा दरकते हैं।

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पहाड़ों की बनावट कुछ ऐसी है कि इनमें बरसात में काफी ज्यादा नमी उत्पन्न होती है। ये पहाड़ छोटी-छोटी चट्टानों के टुकड़ों और मिट्टी से बने हैं। जानकारों का कहना है कि किन्नौर और प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में होने वाले भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए वैज्ञानिक आधार पर उचित कदम उठाए जाने चाहिए। जलविद्युत और अन्य परियोजनाओं के जो कार्य किए जा रहे हैं, उनके निर्माण में सुरक्षा व इससे पर्यावरण के संरक्षण के लिए भी ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

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