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किन्नौर निगुलसरी भूस्खलन: चौथे दिन छह और शव निकाले, पांच यात्री अब भी लापता

Sat, 14 Aug 2021 07:44 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, भावानगर (किन्नौर)

सार

 किन्नौर जिले में नेशनल हाईवे-5 पर निगुलसरी के पास पहाड़ टूटने के हादसे के चौथे दिन शनिवार को बचाव दलों ने छह और शवों को निकाल लिया है। इस हादसे के मृतकों की संख्या अब 23 पहुंच गई है।
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किन्नौर निगुलसरी में भूस्खलन: रेस्क्यू में जुटे जवान। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में नेशनल हाईवे-5 पर निगुलसरी के पास पहाड़ टूटने के हादसे के चौथे दिन शनिवार को बचाव दलों ने छह और शवों को निकाल लिया है। इस हादसे के मृतकों की संख्या अब 23 पहुंच गई है। अब सिर्फ पांच लोग ही लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी प्रशासन ने सूची जारी कर दी है। 

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बचाव दलों ने सुबह के समय दो शवों को निकाला। इसके बाद घटनास्थल पर पत्थर गिरने की वजह से सर्च ऑपरेशन बार-बार बाधित होता रहा। हालांकि, शाम पांच बजे तक चार और शवों को निकाल लिया गया। सभी शवों की पहचान कर उनके परिजनों को सौंप दिए हैं। जिला प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को फौरी राहत के रूप में 20-20 हजार रुपये की राशि दी है। उपायुक्त आबिद हुसैन सादिक ने बताया कि जब तक लापता व्यक्तियों की तलाश पूरी नहीं हो जाती, सर्च अभियान जारी रहेगा। 




 

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शनिवार को निकाले गए मृतकों की सूची
प्रभु लाल, गांव एवं डाकघर उरनी जिला किन्नौर 
गगत ओली, गांव सलयान निवासी नेपाल
गुलांछी, पत्नी अरुण कुमार गांव एवं डाकघर रामनी तहसील निचार जिला किन्नौर
दलीप सिंह गांव व डाकघर ज्ञाबूंग तहसील पूह जिला किन्नौर 
खेमलाल गुरंग, निवासी नेपाल 
बिराज नाथ, गांव कोटनगर जिला रूकाम निवासी नेपाल

अभी ये लोग हैं लापता
सूर्यावंश, गांव ननसपों तहसील निचार जिला किन्नौर
मेहर चंद, गांव टिकरी डाकघर खरगा तहसील निरमंड
संतोष कुमारी, पत्नी रमेश चंद गांव सुगरा तहसील निचार
ज्वाला देवी, पत्नी उमेश गांव बरी तहसील निचार 
बलराम कुमार, गांव एवं डाकघर देहलान, जिला ऊना 
 

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लाहौल में चंद्रभागा नदी पर भी टूटा पहाड़, चार घर जलमग्न, छह गोशालाएं क्षतिग्रस्त

किन्नौर के बाद अब जनजातीय जिला लाहौल स्पीति की पट्टन घाटी में चंद्रभागा नदी पर पहाड़ टूटा है। शुक्रवार सुबह 9:00 बजे भारी भूस्खलन से कई टन मलबा और चट्टानें नदी में गिर गईं। इससे पानी का बहाव दो घंटे के लिए रुक गया। जलस्तर 20 गुना ज्यादा बढ़ गया। 

अफरातफरी के बीच जान बचाने के लिए नदी के किनारे बसे तडंग, जसरथ, नालडा और जुंडा गांव के सहमे लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भाग गए। हालांकि, 11:00 बजे नदी के बहाव ने मलबे के बीच से रास्ता बना लिया और खतरा कम हो गया। इससे प्रशासन और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और लोग लौट आए। 

लेकिन,क्षेत्र में पानी भरने से तडंग गांव में चार घर जलमग्न हो गए जबकि छह गोशालाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। दो मवेशी और करीब 50 बीघा जमीन बह गई। सेब के साथ फूल गोभी, मटर, आलू की फसल तबाह हो गई है। नालडा से जुंडा गांव के लिए सिंचाई परियोजना भी क्षतिग्रस्त हुई है।
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