लंबे समय से कर्मचारियों की लंबित एक महत्वपूर्ण मांग को मानते हुए जयराम सरकार ने बड़ा तोहफा दे दिया है। लिपिक और जूनियर ऑफिस असिस्टेंट अब 10 साल में प्रमोट हो सकेंगे। पहले इस वर्ग को 13 साल के बाद प्रमोशन का प्रावधान था।
इसमें तीन साल का अनुबंध और 10 साल का नियमित सेवाकाल गिना जाता था। अब सरकार ने प्रमोशन के लिए नियमित सेवाकाल की 10 साल की शर्त को हटाकर सात साल कर दिया है। जबकि अनुबंध सेवाकाल तीन साल का ही रहेगा। इससे प्रदेश के विभिन्न विभागों में तैनात इन कर्मचारियों को राहत मिली है।
तीन साल के अनुबंध के बाद सात साल का नियमित सेवाकाल पूरा करने पर संबंधित कर्मचारी पदोन्नति के लिए पात्र हो जाएगा। लंबे समय से कर्मचारी संगठनों की ओर से इस अनुबंध काल को नियमित सेवा काल की शर्त में समाहित करने की मांग उठती रही थी।
चूंकि अब जल्द ही कर्मचारियों के साथ सरकार की जेसीसी बैठक होनी है, ऐसे में सरकार ने इस बैठक से पहले ही कर्मचारियों को बड़ी सौगात दे दी है। इस फैसले से हजारों कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ जल्द मिल सकेगा।
कर्मचारी हित में मुख्यमंत्री ने लिया बड़ा फैसला
हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने समस्त विभागों में कार्यरत लिपिकों को वरिष्ठ सहायक के पद पर पदोन्नति देने के लिए 10 वर्षों के सेवा काल को घटाकर 7 वर्ष करने पर सरकार का आभार जताया है। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी ठाकुर ने कहा कि जयराम सरकार ने यह एक ऐतिहासिक अधिसूचना जारी की है। 10 वर्षों के सेवाकाल को घटाकर 7 वर्ष करने के लिए भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट हो जाता है कि मुख्यमंत्री कर्मचारी हित में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से सभी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों में खुशी का माहौल है।
पदोन्नति की समय अवधि घटाने पर सरकार का आभार
हिमाचल प्रदेश समस्त विभाग लिपिक वर्ग कर्मचारी महासंघ ने लिपिक से सीनियर असिस्टेंट पदोन्नति की समयावधि 10 वर्ष से सात साल करने पर सरकार का आभार जताया है। महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष वीरेंदर शर्मा, महासचिव एलडी चौहान, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गंगा राम, कानूनी सलाहकार अमर शर्मा ने कहा की 1 मार्च 2020 को समस्त विभाग लिपिक वर्ग कर्मचारी संघ के चुनाव जलशक्ति भवन में हुए थे। संघ का एकमात्र लक्ष्य लिपिक वर्ग की मांगो को सरकार से पूरा करवाना था। संगठन के गठन का पूरा ब्योरा प्रदेश सरकार को भी भेजा गया था।