याचिका में नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में स्वस्थ हरे पेड़ों की अवैध कटाई व वन संरक्षण अधिनियम, नगर निगम अधिनियम, सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा पारित निर्देशों के उल्लंघन के मुद्दे को उजागर किया है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पेड़ों को काटने के लिए दी गई सभी वैध अनुमतियों पर लगाई रोक हटा दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि कोई भी पेड़ और किसी पेड़ की एक भी शाखा को बिना किसी कानूनी अधिकार के किसी भी परिस्थिति में नहीं काटा जाएगा। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने जनहित याचिका में ये आदेश पारित किए। याचिका में नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में स्वस्थ हरे पेड़ों की अवैध कटाई व वन संरक्षण अधिनियम, नगर निगम अधिनियम, सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा पारित निर्देशों के उल्लंघन के मुद्दे को उजागर किया है।
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इसके बाद कोर्ट ने अपने पिछले आदेशों में पेड़ों को काटने पर रोक लगा दी थी। याचिकाकर्ता ने असंख्य पेड़ों की कटाई के लिए दी गई अनुमतियों को रद्द करने और अधिकारियों को हरे पेड़ों की अवैध कटाई की प्रक्रिया को आगे न बढ़ाने और न्यायालय की अनुमति के बिना भविष्य में अनुमति देने से रोकने के लिए प्रार्थना की थी। न्यायालय ने चार मई को पारित आदेशों में हिमाचल प्रदेश के विद्युत विभाग को दी गई अनुमतियों को छोड़कर पेड़ों की कटाई व काटने की सभी अनुमतियों पर रोक लगा दी थी।
हालांकि, राज्य ने अंतरिम आदेश के संशोधन के लिए आवेदन दायर किया, जिसमें कहा गया था कि मानसून का मौसम अपने चरम पर है और खतरनाक पेड़ों के उखड़ने की संभावना है जिससे जीवन और संपत्ति को खतरा हो सकता है। न्यायालय ने कहा कि चार मई के अंतरिम आदेश को केवल उन पेड़ों के संबंध में पढ़ा जाना है जो अवैध रूप से या बिना किसी अनुमति के काटे जा रहे हैं।
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वह हमेशा उक्त आदेश के खिलाफ अपील दायर करने के लिए स्वतंत्र है और आकस्मिक मामलों पर विचार करने के बाद संबंधित कानून के प्रावधानों के तहत अनुमति प्रदान की गई है इसलिए अंतरिम आदेश में संशोधन की जरूरत है। कोर्ट ने राज्य को निर्देश दिया कि जब तक कानून में ऐसा करने की वैध अनुमति न हो तब तक वह किसी भी तरह से पेड़ों को न काटें। कोर्ट ने मामले को दो हफ्ते बाद सुनवाई के लिए रखा है।