हिमाचल प्रदेश में सरकार ड्रोन से खनन माफिया पर नजर रखेगी। पहले चरण में तीन जिलों ऊना, सिरमौर और कांगड़ा में ड्रोन से नजर रखी जा रही है। जिला प्रशासन के पास खनिज से जुटी राशि से ड्रोन खरीदे गए हैं। खनन विभाग के अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पिछले दिनों अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। इसमें प्रदेश में अवैध खनन रोकने के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद से खनन विभाग ने खनन माफिया पर नजर रखने के लिए तीन जिलों में ड्रोन उपलब्ध करा दिए हैं। ये ड्रोन पुलिस विभाग के कर्मी इस्तेमाल करेंगे। किसी भी प्रकार की अवैध खनन गतिविधियां सामने आते ही तत्काल विभाग को सूचित करेंगे। खनन विभाग के अधिकारियों की टीम मौके पर जाकर अवैध खनन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।
जिला प्रशासन के पास जमा रहता है फंड
जिला प्रशासन के पास खनन पट्टा मालिक प्रति टन 10 रुपये कोष में जमा करते हैं। वर्तमान में जिला उपायुक्तों के पास पांच से दस करोड़ तक राशि जमा है। खनन से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए डीसी राशि जारी करते हैं। यह राशि खनन क्षेत्र में पेयजल योजनाओं और सड़कों के नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए दी जाती है। कोष में जमा राशि से ही ड्रोन उपलब्ध कराए हैं।
राज्य के जियोलॉजिस्ट पुनीत गुलेरिया कहते हैं कि पहले चरण में प्रदेश के तीन जिलों ऊना, कांगड़ा और सिरमौर में खनन माफिया पर ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है। ये ड्रोन स्थानीय पुलिस के पास रखे हैं। खनन गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। ये ड्रोन जिलों के डीसी ने उपलब्ध कराए हैं।