हिमाचल निर्माता डॉ. वाईएस परमार के गृह विधानसभा क्षेत्र पच्छाद में भाजपा व कांग्रेस की दो महिला प्रत्याशियों की राह में निर्दलीय उम्मीदवार गंगूराम मुसाफिर हैं। यही नहीं राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी से मैदान में उतरे सुशील भृगु के जरिए भी इस बार विस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशी के चुनावी समीकरण बिगड़ सकते हैं।
दरअसल, मुकाबला इसलिए भी इस आरक्षित सीट पर रोचक बना हुआ है क्योंकि यहां राजपूत और ब्राह्मण वोटर ही किसी भी प्रत्याशी के लिए जीत का फैक्टर बनेंगे। इसी सीट पर सबसे ज्यादा क्षेत्रवाद, जातिवाद और गुटवाद बना हुआ है। भाजपा ने 2019 के उपचुनाव के बाद लगातार दूसरी पर रीना कश्यप को पार्टी प्रत्याशी बनाया। वहीं भाजपा से कांग्रेस में शामिल हुई दयाल प्यारी को पार्टी ने यहां से चुनावी मैदान में उतारा है।
यहां क्लिक कर देखें अपने चुनाव क्षेत्र के अपडेट
इस सीट पर रोचक पहलू यह है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे गंगूराम मुसाफिर को इस बार पार्टी का टिकट नहीं मिला तो वह निर्दलीय ही चुनावी मैदान में उतरकर अपना भाग्य आजमा रहे हैं। मुसाफिर यहां से लगातार सात बार विधायक रह चुके हैं। इस बार इस सीट पर आप से अजय सिंह और सीपीआईएम ने भी पहली बार आशीष कुमार को प्रत्याशी बनाकर चुनावी मैदान में उतारा है।
पच्छाद विस सीट इस वजह से दिलचस्प
पच्छाद विधानसभा सीट हिमाचल निर्माता डॉ. वाईएस परमार का गृह क्षेत्र रही है। 1952 में डॉ. परमार यहां से पहली बार विधायक बने थे। वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप भी इसी विधानसभा क्षेत्र से आते हैं। वह भी यहां से दो मर्तबा विधानसभा का चुनाव जीत चुके हैं। इसके अलावा इस विधानसभा क्षेत्र से लगातार 7 बार मुसाफिर विधायक रहे चुके हैं, लेकिन 2007 के चुनाव के बाद से उन्हें लगातार हार का मुंह देखना पड़ रहा है।
दूसरी बार चुनावी मैदान में रीना कश्यप
दूसरी तरफ 2019 में पच्छाद में हुए उपचुनाव में रीना कश्यप को भाजपा ने पहली बार पार्टी का टिकट दिया और वह जीत दर्ज कर विधानसभा में पहुंची। उस समय विधायक सुरेश कश्यप लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद में पहुंचे थे। इसके चलते यहां उपचुनाव हुए थे। 2022 के इस चुनाव में भी भाजपा ने रीना को भी पार्टी प्रत्याशी बनाया है।
कांग्रेस के टिकट पर पहली बार दयाल प्यारी
पच्छाद से भाजपा नेत्री रही दयाल पहली विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले कांग्रेस में शामिल हो गई थी। वह कांग्रेस का यहां से टिकट भी हासिल करने में कामयाब रहीं। इस चुनाव में कांग्रेस की प्रत्याशी दयाल प्यारी की राहें भी इस चुनाव में आसान नहीं हैं, क्योंकि यहां से कांग्रेस का एक बड़ा धड़ा उन्हें टिकट देने से नाराज चल रहा है। सीधे-सीधे यह कार्यकर्ता मुसाफिर को टिकट देने की वकालत कर रहे थे। 2019 के उपचुनाव में भी वह पच्छाद से बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतरी थीं और अच्छी खासी वोट हासिल करने में कामयाब भी रही थीं। हालांकि वह जीत दर्ज नहीं कर सकीं। लिहाजा इस चुनाव में वह भी यहां से अन्य प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर दे रही है।
अब तक इन्होंने किया पच्छाद का नेतृत्व
पच्छाद विस क्षेत्र पर अधिकतर समय कांग्रेस का ही कब्जा रहा है। यहां से 1 952 में डॉ. वाईएस परमार पहली बार विधायक बने थे। इसके बाद 1957 में मांगा राम, 1962 में माता राम, 1967 में जालम सिंह, 1977 में श्रीराम जख्मी, 1982, 1985, 1990, 1993, 1998, 2003 व 2007 में गंगूराम मुसाफिर, 2012 व 2017 में सुरेश कश्यप और 2019 के उपचुनाव में रीना कश्यप विधायक रहीं।
78.30 प्रतिशत दर्ज हुआ मतदान
पच्छाद विस क्षेत्र में इस विस चुनाव में 78.30 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। यहां कुल 76,609 मतदाताओं में से इस बार 59,983 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इसमें 31,539 पुरूष व 28,443 महिला मतदाता शामिल हैं। जबकि एक अन्य थर्ड जेंडर मतदाता ने भी यहां मत डाला। इससे पहले 2017 के चुनाव में इस सीट पर 78.25 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ था।
अपनी पसंद की सीट को फॉलो करके पाएं हर अपडेट
अगर आप किसी सीट विशेष के नतीजे में ही दिलचस्पी रखते हैं तो आप उससे जुड़ा अपडेट भी अमर उजाला App और amarujala.com पर पा सकते हैं। इसके लिए आपको उस सीट को फॉलो करना होगा। इसका तरीका बेहद आसान है। आप हमारे App या वेबसाइट के चुनाव पेज पर जाकर चुनाव क्षेत्र चुनें और उसे फॉलो कर लें। चुनाव क्षेत्र फॉलो करते ही आपको उससे जुड़े हर अपडेट नोटिफिकेशन के जरिए मिलते रहेंगे। अपने क्षेत्र को फॉलो करने के लिए इस पेज पर विजिट करें।