हिमाचल प्रदेश में उपचुनाव से पहले भाजपा ने दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से सहानुभूति और कांग्रेस ने पूर्व सांसद रामस्वरूप शर्मा की संदिग्ध हत्या को अपना-अपना हथियार बना लिया है। भाजपा विधायक जहां वीरभद्र सिंह की तारीफों के पुल बांध रहे हैं, वहीं कांग्रेस विधायकों ने पूर्व सांसद की संदेहास्पद मौत पर सीबीआई जांच बैठाने की मांग कर प्रदेश का राजनीतिक माहौल गरमा दिया है।
प्रदेश के दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के लक्ष्य में मंडी लोकसभा और फतेहपुर, जुब्बल कोटखाई व अर्की विधानसभा का उपचुनाव हैं। विधानसभा मेें अपने-अपने तरकश से दोनों दलों ने राजनीतिक तीर साधना शुरू कर दिए हैं। मानसून सत्र के पहले दिन शोकोद्गार प्रस्ताव पर विधानसभा के इतिहास में सबसे लंबी चर्चा हुई। सरकार ने इसमें बढ़-चढ़कर भाग लिया। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह चर्चा के केंद्र में रहे।
कांग्रेस विधायकों के अलावा भाजपा के अधिकांश विधायकों ने इसमें शामिल होकर पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की तारीफों के पुल बांधे। भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के प्रति जताई जा रही आस्था कई कांग्रेस नेताओं को अब अखरना भी शुरू हो गई है। सितंबर में प्रस्तावित उपचुनावों से पहले कांग्रेसी अंदरखाते बीते कुछ दिनों से इसकी काट तलाशने में जुटे हुए थे। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ला की मौजूदगी में बीते दिनों हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में भी इस मामले को लेकर चर्चा हुई है।
इसी बीच मानसून सत्र के दूसरे दिन विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस ने भाजपा के दिवंगत सांसद रामस्वरूप शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला उठाकर सरकार और भाजपा को कठघरे में खड़ा कर दिया। रामस्वरूप शर्मा के पुत्र की मांग को सदन में उठाते हुए कांग्रेस विधायकों ने सीबीआई से मामले की जांच उठाई। सरकार पर इस मामले पर पर्दा डालने के आरोप भी लगाए। आने वाले दिनों में जनता के बीच जाकर भी कांग्रेस इस मामले को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है।