सरकार का 102 एंबुलेंस चलाने का करार 14 नवंबर तक था, जबकि 108 का करार 16 नवंबर को खत्म हो जाएगा। कंपनी ने कर्मचारियों को बर्खास्तगी पत्र थमा दिए थे, अब उन्हें वापस बुलाया गया है।
हिमाचल में 102 एंबुलेंस का करार खत्म होने के बाद सोमवार दोपहर 4 बजे तक गर्भवती और प्रसूता महिलाएं परेशान रहीं। उन्हें अस्पताल पहुंचने और डिस्चार्ज होने के बाद घर लौटने में दिक्कतों का सामना पड़ा। दिनभर कंपनी का कॉल सेंटर बंद रहा।
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शाम के समय स्वास्थ्य सचिव अमिताभ अवस्थी, एनएचएम के निदेशक और जीवीके कंपनी के अधिकारियों की वार्ता सिरे चढ़ी और 102 एंबुलेंस सेवा बहाल हुई। अब कंपनी 30 नवंबर तक सेवाएं देने के लिए तैयार हो गई है। हालांकि, लेटलतीफी के चलते रविवार देर शाम से बंद एंबुलेंस सेवा से सोमवार सुबह से दिनभर महिला मरीजों को परेशान होना पड़ा।
जीवीके को पहले ही सेवाएं जारी रखने का ऑफर दिया था, लेकिन कंपनी एग्रीमेंट से हटकर कोरोना काल के दौरान हुए घाटे को लेकर वित्तीय मदद की मांग कर रही थी। कंपनी के साथ हुई वार्ता में वित्तीय मदद के मामले को आगामी कैबिनेट की बैठक में लाने की सहमति बनी। ऐसे में कंपनी सेवाएं देने के लिए राजी हुई है।
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सरकार का 102 एंबुलेंस चलाने का करार 14 नवंबर तक था, जबकि 108 का करार 16 नवंबर को खत्म हो जाएगा। कंपनी ने कर्मचारियों को बर्खास्तगी पत्र थमा दिए थे, अब उन्हें वापस बुलाया गया है। एनएचएम निदेशक हेमराज बैरवा ने बताया कि कंपनी सेवाएं देने को राजी हुई है। सोमवार शाम से कंपनी ने सेवाएं देनी शुरू कर दी हैं।
अस्पताल परिसर में खड़ी रहीं एंबुलेंस
102 और 108 एंबुलेंस कर्मचारी एसोसिएशन के अध्यक्ष पूर्ण चंद ने कहा कि प्रदेश में कॉल सेंटर बंद रहने से चालकों को सेवाओं के लिए फोन नहीं आए हैं। गाड़ियां चालकों के साथ अस्पताल परिसर में खड़ी रहीं।