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संपत्ति मामले में सीएम वीरभद्र को झटका, जांच में शामिल होने के आदेश

Thu, 07 Apr 2016 12:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह
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दिल्‍ली हाईकोर्ट में बुधवार का दिन हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के लिए कुछ राहत तो कुछ झटके का रहा। अदालत ने वीरभद्र व उनकी पत्नी को आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच में शामिल होने का निर्देश दिया है। इसके अलावा अदालत ने सीबीआई को भी निर्देश दिया कि वे उन्हें गिरफ्तार नहीं करेगी।
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न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी ने यह आदेश वीरभद्र व उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह के उस तर्क को स्वीकार करते हुए दिया कि वे दोनों जांच में सहयोग को तैयार हैं। लेकिन उन्हें जांच प्रक्रिया में शामिल होने पर गिरफ्तारी का अंदेशा है।

अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि सीबीआई दोनों को बिना अदालत की इजाजत के गिरफ्तार नहीं करेगी। सीबीआई ने आवेदन दायर कर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा उनकी गिरफ्तारी पर रोक के खिलाफ दायर सीबीआई की याचिका पर यह निर्देश दिया।
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सीएम के वकीलों ने कोर्ट में दिए ये तर्क

जेठमलानी ने कहा कि वीरभद्र सिंह वर्तमान में मुख्यमंत्री हैं और उनके सम्मान-गरिमा को संरक्षित करना जरूरी है।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पीएस पटवालिया ने तर्क रखा कि हमें जांच में खुली छूट की अनुमति दी जानी चाहिए। हम कोई अनुचित रूप से व्यवहार नहीं करने जा रहे हैं। वीरभद्र की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी व कपिल सिब्बल ने उनके तर्क पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनके मुवक्किल जांच में शामिल होना चाहते हैं लेकिन उनको गिरफ्तारी से संरक्षण मिलना चाहिए।

सिब्बल ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल वीरभद्र सिंह के तीन महल हैं, दो हजार एकड़ वन भूमि है। उन पर मात्र छह करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का मामला चलाया जा रहा है।

जेठमलानी ने कहा कि वीरभद्र सिंह वर्तमान में मुख्यमंत्री हैं और उनके सम्मान-गरिमा को संरक्षित करना जरूरी है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ ने एक अक्तूबर 2015 को वीरभद्र की याचिका पर उनकी गिरफ्तारी, पूछताछ व आरोप पत्र दायर करने पर भी रोक लगा दी थी।
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वीरभद्र सिंह के बेटे व बेटी की याचिका पर हाईकोर्ट ने दिया निर्देश

अदालत ने कहा कि वे सरकार व ईडी का पक्ष सुनने के बाद ही कोई निर्णय करेंगे।
हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पुत्र और पुत्री की याचिका पर केंद्र सरकार व प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में उन्होंने मनी लाउंड्रिंग मामले में ईडी द्वारा उनकी संपत्ति जब्त करने के लिए जारी आदेश को चुनौती दी है। मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी व न्यायमूर्ति जयंतनाथ की खंडपीठ ने वीरभद्र के बेटे विक्रमादित्य सिंह व बेटी अपराजिता कुमारी के अधिवक्ता के उस तर्क को खारिज कर दिया कि ईडी के आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।

अदालत ने कहा कि वे सरकार व ईडी का पक्ष सुनने के बाद ही कोई निर्णय करेंगे। खंडपीठ ने कहा कि उनकी नजर में फिलहाल मामले की सुनवाई की कोई जल्दी नहीं है। अदालत ने सरकार व ईडी को 18 अप्रैल तक स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न याचिका स्वीकार कर ली जाए। याचिका में ईडी द्वारा 23 मार्च को दिए आदेश के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी गई है।

सुनवाई के दौरान याची की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित सिब्बल ने तर्क रखा कि उनके मुवक्किलों को राहत दिया जाना जरूरी है और ईडी का आदेश गलत तरीके से जारी किया गया है। अमित सिब्बल ने सुनवाई 18 अप्रैल तय होने पर कहा कि इस अवधि में संरक्षण जरूरी है और ईडी 23 मार्च को जारी आदेश के आधार पर 30 दिनों में कार्रवाई कर सकती है।

खंडपीठ ने कहा कि आप संवैधानिक वैधता को चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में ईडी और केंद्र को जवाब दाखिल करने का अवसर दिया जाना जरूरी है। याचिका में धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 5 (1) में भी हाल ही में किए गए संशोधन को भी चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि प्रवर्तन निदेशालय ने वीरभद्र सिंह की पुत्री अपराजिता कुमारी की 15.85 लाख रुपये की अचल संपत्ति और उनके पुत्र विक्रमादित्य की 62.80 लाख रुपये की संपत्ति कुर्क की है।

उन्होंने तर्क दिया कि दर्ज प्राथमिकी में उनका नाम नहीं है और ईडी ने बिना नाम के ही उनकी संपत्ति को जब्त कर लिया। उन्होंने कहा कि ईडी ने यह कार्रवाई मात्र आयकर विभाग की जांच के आधार पर की उनकी अपनी कोई जांच नहीं है। याचिका में दोनों ने तर्क रखा है कि उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं है और जो भी आरोप हैं वे वीरभद्र सिंह के खिलाफ हैं। यह मामला भी आयकर अथॉरिटी में लंबित है। इसके अलावा ईडी ने कोई भी जब्ती आदेश पारित करने से पूर्व उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए समन तक जारी नहीं किया।
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