वर्ष 1962 में भारत पर चीन के आक्रमण पर वरिष्ठ भाजपा नेता शांता कुमार की 50 वर्ष पहले लिखी गई पुस्तक ‘हिमालय पर लाल छाया’ का विमोचन 14वें तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा मैकलोडगंज स्थित अपने निवास स्थान पर करेंगे।
धर्मशाला में प्रेस वार्ता के दौरान इसका खुलासा शांता कुमार ने किया। कहा कि यह पुस्तक उन्होंने वर्ष 1962 में चीन के आक्रमण के बाद लिखी थी। 50 वर्ष बाद इसे दोबारा प्रकाशित करवाया है। शांता ने चीन एक महाशक्ति, पाकिस्तान से उसकी मित्रता और इस संकट को लेकर शोधपरक पुस्तक लिखी है।
उनके जीवन पर आधारित डॉ. हेमराज कौशिक द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘साहित्यसेवी राजनेता शांता कुमार’ उनके सृजन और चिंतन पर केंद्रित है। पहली नवंबर को उनकी और उनकी पत्नी संतोष शैलजा की अंग्रेजी में लिखित कहानियों का संग्रह ‘इफ ऑटम कम्ज’ और हिंदी साहित्य के सुपरिचित आलोचक डॉ. हेमराज कौशिक द्वारा उनकी जीवन पर लिखी गई पुस्तक ‘साहित्यसेवी राजनेता शांता कुमार’ पुस्तकों का विमोचन दलाईलामा करेंगे।
दलाईलामा को चीन अपना सबसे बड़ा राजनीतिक शत्रु मानता है। अब भारत-चीन युद्ध पर शांता की पुस्तक का विमोचन खुद दलाईलामा कर रहे हैं। इन दिनों चीन के खिलाफ भारतीय लोगों में गुस्सा चरम पर है।