प्रदेश के लोगों पर महंगाई की एक और मार पड़ने वाली है। यहां बस किराए में वृद्घि की तैयारी चल रही है। निजी बस ऑपरेटर किराया बढ़ाने के लिए सरकार पर दबाव बनाने जा रहे हैं। इसके लिए जल्दी ही एक बैठक बुलाई जा रही है।
सरकार की तरफ से आठ महीने पहले बढ़ाए किराये को ये बस ऑपरेटर नाकाफी बता रहे हैं। डीजल के बढ़ते दामों के कारण एक बार फिर से किराया बढ़ाने को सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी है।
हिमाचल में मौजूदा समय में 4000 निजी बसें सेवाएं दे रही हैं। इन्हीं में किराया बढ़ाने की बात उठाई गई है।
अब देने होंगे ज्यादा पैसे
हिमाचल प्रदेश निजी बस ऑपरेटर संघ के अध्यक्ष जैसीराम शर्मा ने कहा है कि लगभग आठ-नौ महीने पहले भी निजी बस ऑपरेटर संघ इसी तरह से लामबंद हुए थे। फिर एक अक्तूबर 2013 को किराया एक रुपये 11 पैसे प्रति किलोमीटर बढ़ाने का निर्णय हुआ था।
यह बढ़ोतरी 30 फीसदी की गई थी। उस समय डीजल के रेट 51.73 रुपये प्रति लीटर के आसपास थे। आज ये लगभग 57.60 रुपये प्रति लीटर या प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में इसके आसपास है। ऐसे में फिर से 30 फीसदी तक किराया बढ़ सकता है।
आठ महीने में इस रिकार्ड बढ़ोतरी से निजी बस ऑपरेटर परेशान हैं। जैसीराम शर्मा बोले कि प्रदेश में वर्तमान में लगभग 4000 निजी बसें चल रही हैं।
बीमा प्रीमियम बढ़ाने से भी नाराज
डीजल के बढ़े रेट से मौजूदा किराये के हिसाब से इनका गुजारा नहीं हो पा रहा है। संघ के महासचिव वीरेंद्र गुलेरिया ने कहा कि एक तरफ तो डीजल के रेट बढ़ रहे हैं और दूसरी तरफ थर्ड पार्टी बीमा प्रीमियम को भी 80 रुपये प्रति सीट तक बढ़ा दिया गया है।
यानी 42 सीटर बस में इसमें सीधी 3360 रुपये की सालाना बढ़ोतरी की गई है। ऐसे ही कई खर्चे बढ़े हैं। ऑपरेटर ऐसे कई मामले भी उठाएंगे।
संघ के प्रदेशाध्यक्ष जैसीराम शर्मा ने यह भी मांग उठाई है कि ट्रैक्स और मैक्स संचालकों पर राज्य सरकार सख्ती बरते। उन्होंने कहा कि ये अवैध रूप से निजी बस रूटों से सवारियां उठा रहे हैं।