शिक्षा पर लाए गए कटौती प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन में नारेबाजी करते हुए वाकआउट किया।
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केंद्रीय विश्वविद्यालय को लेकर बुधवार को विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। शिक्षा पर लाए गए कटौती प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन में नारेबाजी करते हुए वाकआउट किया। इस दौरान सत्ता और विपक्ष में जमकर नोकझोंक भी हुई। विपक्ष के रवैये से नाराज होकर मुख्यमंत्री ने कहा विपक्ष क्षेत्रवाद की राजनीति कर रहा है।
उन्होंने कहा केंद्रीय विश्वविद्यालय का मुख्य कैंपस धर्मशाला में ही बनेगा। मुख्यमंत्री के इस बयान से भड़के भाजपा विधायक रविंद्र सिंह रवि ने कहा देहरा से केंद्रीय विश्वविद्यालय को बाहर ले जाकर तो दिखाओ। इस बात पर खूब गहमागहमी हो गई। विपक्ष सदन से बाहर चला गया।
कटौती प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा केंद्रीय विश्वविद्यालय को लेकर विपक्ष गलत तस्वीर पेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि देहरा में या अन्य स्थानों पर केंद्रीय विश्वविद्यालय से संबंधित संस्थान खोले जा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि पूर्व में कांग्रेस सरकार के समय में केंद्रीय मंत्री पी. चितंबरम ने धर्मशाला में केंद्रीय विश्वविद्यालय और मंडी में आईआईटी खोलने की घोषणा की थी।
इस घोषणा से पहले ही राज्य सरकार को पीएमओ कार्यालय से फोन के माध्यम से हिमाचल में इन दो स्थानों को खोलने की जानकारी दी गई थी। पीएमओ की जानकारी के बाद केबिनेट ने केंद्रीय विश्वविद्यालय को धर्मशाला व आईआईआईटी को मंडी में खोलने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय को धर्मशाला के अलावा कहीं ओर स्थान पर खोलने का विचार नहीं था और उसी के तहत सरकार ने कार्य किया।
मुख्यमंत्री ने कहा भाजपा इसके बाद सत्ता में आई तो इस पर कोई निर्णय नहीं ले पाई। भाजपा सरकार का केवल यह प्रयास रहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला में न खोला जाए। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय को लेकर विवाद सांसद अनुराग ठाकुर की वजह से हुआ है। अनुराग ठाकुर चाहते थे कि उनके संसदीय क्षेत्र में यह विश्वविद्यालय खुले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी जब हिमाचल आई थी तो उनके साथ उनकी लंबी बातचीत हुई थी। केंद्रीय मंत्री को केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए धर्मशाला में जमीन बताई गई थी। बताया गया था कि यदि यह जमीन उन्हें पसंद नहीं आती है तो इसके लिए अन्य स्थान पर भी जमीन उपलब्ध है।
एक साल में भरे जाएंगे शिक्षा विभाग में रिक्त पद
नारेबाजी के बीच सीएम वीरभद्र ने कहा कि उनके खिलाफ तीन-तीन मामले चलाए गए हैं। उन्होंने इसके लिए नेता प्रतिपक्ष को जिम्मेवार ठहराया।
मुख्यमंत्री के इस जवाब पर भाजपा विधायक रविंद्र सिंह रवि और विक्रम सिंह ने खड़े होकर केंद्रीय विश्वविद्यालय को देहरा में खोलने की मांग की। रविंद्र रवि ने एक पत्र की कॉपी दिखाते हुए कहा कि अप्रैल 2010 में केंद्र सरकार ने सीयू को 70 प्रतिशत निर्माण देहरा और 30 प्रतिशत निर्माण अन्य जगह करने की अधिसूचना जारी की थी।
इस अधिसूचना को लागू करना चाहिए। उन्होंने कहा 23 जनवरी 2013 को मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर 50 दिन में भूमि ट्रांसफर करने का पत्र लिखा था। अगर यह पत्र मुख्यमंत्री ने नहीं लिखा है तो इसकी जांच करवाई जाए। इस दौरान पक्ष और विपक्ष के सदस्य अपनी अपनी सीट पर खड़े हो गए। इसी बीच विपक्ष नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चला गया।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कटौती प्रस्ताव पर हुई चर्चा के जवाब में कहा एक साल के भीतर शिक्षा विभाग में रिक्त चल रहे सभी पदों को भर दिया जाएगा। इसके लिए सरकार अतिरिक्त ग्रांट का बंदोबस्त करेगी। मुख्यमंत्री ने एसएमसी से हो रही भर्तियों के लिए नियम बनाए गए हैं। इसी आधार पर नियुक्तियां हो रही है। उन्होंने कहा कि एसएमसी भर्ती में रोस्टर का भी ध्यान रखा जाएगा।
वीरभद्र सिंह ने कहा प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र का विस्तार हुआ है। ऐसे में कुछ कमियां भी रह जाती हैं। उन्होंने कहा कि जगह-जगह निजी स्कूल खुलने से सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में कमी आई है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के समय में शिक्षा विभाग में 15 हजार 816 रिक्तियां थी। वर्तमान सरकार ने गत तीन सालों में 13 हजार 592 पद भरे हैं।