दौसा चिकित्सा विभाग ने जारी की एडवाइजरी।
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राजस्थान समेत दौसा जिले में शीत लहर का प्रकोप जारी है। इससे बचने के लिए चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुभाष बिलोनिया ने बताया कि शीत लहर का स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, कभी-कभी इससे जनहानि भी हो सकती है। शीतलहर का नकारात्मक प्रभाव बुर्जुगों और छोटे बच्चों पर अधिक होता है। इससे प्रभावित रोगियों के लक्षण शरीर का ठंडा पड़ना, सुन्न पड़ना, नाड़ी का धीमा पड़ जाना, रोएं खड़े हो जाना और सांस तेज चलना समेत आदि होते हैं। रोगी द्वारा समय पर उपचार नहीं लेने पर मृत्यु भी हो सकती है। दिव्यांग व्यक्तियों, र्दीघकालिक बीमारियों से पीड़ित रोगियों, खुले क्षेत्र में व्यवसाय करने वाले छोटे व्यवसायियों के लिए भी शीत लहर के दौरान विशेष सर्तकता बरतना आवश्यक है।
डॉ. सुभाष बिलोनिया ने बताया कि शीत लहर व पाले से बचाव के लिए गर्म वस्त्र के साथ कई परतों के कपड़ों पहनने चाहिए। ज्यादातर काम दिन में निपटाने का प्रयास करें, खुद को और बच्चों को ऊनी कपड़ों से ढ़कें। फुटपाथ पर रहने वाले भ्रमणशील जातियां जैसे भिखारी, गाड़िया, लोहार आदि लोग रात में रैन बसेरा, सार्वजनिक भवन और धर्मशालाओं में रहें।
खुले स्थान पर सोने के दौरान अपने पास अंगीठी जलाएं, नहीं तो लकड़ी और कूड़ा करकट जलाकर अलाव की व्यवस्था करें। शीतलहर में अधिकतर गर्म भोजन का सेवन करें और खाद्य पदार्थ जैसे गुड़, तिल, चाय और कॉफी आदि का सेवन करें। शारीरिक श्रम अधिक करें। हो सके तो सुबह व्यायाम कर तेल की मालिश भी करें। शीतलहर से प्रभावित व्यक्ति को कंबल, रजाई आदि से ढ़कें। पास में अंगीठी और हीटर आदि जलाएं।
गर्म पेय पदार्थ गुड़, चाय, चिकनाई (घी), कॉफी, और गर्म पानी की थैली उपलब्ध हो तो उससे सेक करें। बाद में पास के चिकित्सालय में दिखाएं, जहां तक हो सके गर्म पानी से नहाएं। शीतलहर से प्रभावित व्यक्ति को जल्द से जल्द नजदीकी चिकित्सा संस्थान में इलाज के लिए ले जाएं। रात को अंगीठी आदि कमरे में जलाकर कभी नहीं सोएं, इससे घुटन या मृत्यु भी हो सकती है।